मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़लम आयत 27 तफ़सीर
मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)
7. पहले तो सोचा कि राह भूल गए हैं। किंतु फिर देखा कि बाग़ तो उन्हीं का है तो कहा कि यह तो ऐसा उजाड़ हो गया है कि अब कुछ तोड़ने के लिए रह ही नहीं गया है। वास्तव में, यह हमारा दुर्भाग्य है।
×
Download Our Quran App
For a faster and smoother experience, install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat