कुरान - 75:2 सूरह अल-क़ियामह हिंदी अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

2
وَلَآ أُقۡسِمُ بِٱلنَّفۡسِ ٱللَّوَّامَةِ

Transliteration: (Wa laaa uqsimu bin nafsil lawwaamah)

(अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-क़ियामह आयत 2 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)
2. मनुष्य की अंतरात्मा की यह विशेषता है कि वह बुराई करने पर उसकी निंदा करती है।

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