कुरान - 80:34 सूरह अबस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

34
يَوۡمَ يَفِرُّ ٱلۡمَرۡءُ مِنۡ أَخِيهِ

Transliteration: (Yauma yafir-rul mar-u min akheeh )

34. उस दिन आदमी अपने भाई से भागेगा। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अबस आयत 34 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अबसा (80:34) का व्याख्या - "जिस दिन एक आदमी अपने भाई से भागेगा"

आयत "يَوْمَ يَفِرُّ ٱلۡمَرۡءُ مِنۡ أَخِيهِ" (सूरह अबसा, 80:34) उस भय और संकट को दर्शाती है जो कियामत के दिन हर इंसान पर छाएगा, जब सबसे मजबूत मानवीय संबंध, जैसे भाई का रिश्ता, भी किसी काम नहीं आएगा। लोग केवल अपनी खुद की किस्मत और बचाव में लगे होंगे, और वे सभी से, यहां तक कि अपने प्रियजनों से भी, भागेंगे।

समान क़ुरआनी आयतें:

सूरह अबसा (80:35-37) - परिवार के रिश्ते कट जाएंगे
"وَأُمِّهِ وَأَبِيهِ وَفَصِيلَتِهِ الَّتِي تُؤۡوِيهِ وَمَن فِى ٱلۡأَرۡضِ جَمِيعًۭا ثُمَّ يُنجِيهِ"
अनुवाद: "और उसकी माँ और उसका पिता, और उसकी पत्नी और उसके बच्चे। उस दिन हर आदमी के लिए उसकी अपनी स्थिति पर्याप्त होगी।"
कियामत के दिन, यहां तक कि सबसे करीबी परिवार के सदस्य—माँ, पिता, पत्नी और बच्चे—भी एक दूसरे की मदद नहीं कर सकेंगे, क्योंकि हर व्यक्ति अपनी खुद की किस्मत से व्यस्त होगा।

सूरह अल-कारिआह (101:6-9) - मानव संबंध मायने नहीं रखेंगे
"يَوْمَ يَفِرُّ ٱلۡمَرۡءُ مِنۡ أَخِيهِ وَأُمِّهِ وَأَبِيهِ وَفَصِيلَتِهِ ٱلَّتِى تُؤۡوِيهِ وَمَن فِى ٱلۡأَرۡضِ جَمِيعًۭا لّٰٓكُلِّ امرِءٍۢ مِّنۡهُمۡ يَوۡمَئِذٍۢ شَأْنٌۭ يُغۡنِيهِ"
अनुवाद: "जिस दिन एक आदमी अपने भाई, अपनी माँ, अपने पिता, अपनी पत्नी और अपने बच्चों से भागेगा, उस दिन हर आदमी के पास अपनी स्थिति होगी जो उसे दूसरों से बेखबर कर देगी।"
यह आयत यह दिखाती है कि कियामत के दिन, सबसे मजबूत मानवीय रिश्ते भी कोई आराम नहीं देंगे, क्योंकि हर व्यक्ति केवल अपनी खुद की किस्मत के बारे में चिंतित होगा।

सूरह अल-ज़लज़लाह (99:6-8) - पृथ्वी गवाही देगी
"وَقَالَ ٱلۡإِنسَٰنُ مَا لَهَا يَوۡمَئِذٍۢ تُحَدِّثُ أَخۡبَٰرَهَا بِأَنَّ رَبَّكَۤ أَوۡحَىٰ لَهَا"
अनुवाद: "और इंसान कहेगा, 'इसमें क्या हुआ?' उस दिन, यह अपनी खबरें बताएगी, क्योंकि तुम्हारे रब ने इसे आदेश दिया है।"
यह सूरह यह बताती है कि पृथ्वी स्वयं इंसान के कर्मों की गवाही देगी, जो यह दर्शाती है कि लोग अपने कर्मों के लिए जवाबदेह होंगे।

सूरह अल-मुतफ्फ़िफ़ीन (83:14-17) - बदला देने के दिन का इनकार
"إِنَّ ٱلَّذِينَ يُكَذِّبُونَ بِٱلۡجَزَاءِ لَفِى ضَلَٰلٍۢ بَعِيدٍۢ"
अनुवाद: "निश्चित रूप से, जो लोग बदला देने के दिन को झूठा मानते हैं, वे एक दूर की गुमराही में हैं।"
यह सूरह उन लोगों के बारे में है जो कियामत के दिन को अस्वीकार करते हैं, लेकिन उस दिन, सभी लोग सत्य देखेंगे और कोई भी हिसाब से बच नहीं सकेगा।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now