Transliteration: (Wujoo huny-yauma-izim-musfira; )
(The Revelation of Faith and State through the Face)
जिस प्रकार इस दुनिया में बीमारी, ग़ुस्सा, सुकून, दौलत, ग़रीबी, हैरानी, उलझन और अन्य भावनाएँ चेहरे से स्पष्ट होती हैं, उसी प्रकार क़ियामत के दिन ईमान, कुफ्र, परहेज़गारी और गुनाह भी चेहरों से ज़ाहिर हो जाएंगे।
बल्कि, आम मोमिनों, नबियों और औलियाओं के चेहरों में स्पष्ट अंतर होगा। चेहरा अल्लाह तआला की किताब की तरह है, जो व्यक्ति की आंतरिक स्थिति को प्रकट करता है।
इसी कारण, इस्लाम में किसी के चेहरे पर मारने या उसे विकृत करने से मना किया गया है, क्योंकि चेहरा अल्लाह की हिकमत और तख़लीक़ (सृष्टि) का प्रतिबिंब माना जाता है।
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