कुरान - 90:11 सूरह अल-बलद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

11
فَلَا ٱقۡتَحَمَ ٱلۡعَقَبَةَ

Transliteration: (Falaq tahamal-'aqabah )

11. लेकिन उसने ऊँचाई तक चढ़ने की कोशिश नहीं की [11]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-बलद आयत 11 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

अविश्वास और आभार: इंसान की नासमझी (Unfaithfulness and Gratitude: A Complaint Against Man's Ingratitude)

यह आयत इंसान के आभार की कमी (ingratitude) और उसकी नासमझी (lack of gratitude) को दिखाती है, जो अल्लाह की दी हुई अनगिनत नेमतों (bounties) के बावजूद, जैसे जीवन (existence) और ज़िन्दगी की जरुरतें (sustenance), सही तरीके से आभार नहीं व्यक्त करता। इंसान ने जो अनगिनत नेमतें पाई हैं, उसके बावजूद वह धार्मिक कार्यों (righteous deeds) के जरिए आभार (gratitude) नहीं दिखाता।

आभार की कमी और शिकायत (Ungratefulness and Complaint)

  • इस आयत में इंसान की नासमझी को बताया गया है, जो अल्लाह की दी हुई नेमतों के लिए आभार (gratitude) दिखाने की बजाय सही काम नहीं करता है। अल्लाह की यह शिकायत (complaint) इंसान के अविश्वास और आभार की कमी को लेकर है, हालांकि उसे सेहत (health), दौलत (wealth), और मार्गदर्शन (guidance) जैसी बहुत सारी नेमतें मिली हैं।
  • इसे ऐसे समझा जा सकता है जैसे एक आदमी को भारी काम करने के बाद पैसे (salary) मिलते हैं, लेकिन वह काम सही से नहीं करता। इसी तरह, इंसान अल्लाह की दी हुई नेमतों के लिए आभारी नहीं होता, जबकि उसे शारीरिक और आध्यात्मिक (spiritual) कल्याण के लिए सब कुछ मिला हुआ है।

अच्छे कर्मों में जल्दबाजी (Urgency in Good Deeds)

  • "जल्दबाजी" (hurried) शब्द का मतलब है कि अच्छे कामों को टालना नहीं चाहिए। हमें अच्छे कर्म तुरंत करने चाहिए, क्योंकि जीवन बहुत छोटा है और अल्लाह की ख़ुशी (pleasure) पाने का समय बहुत सीमित है।
  • अच्छे कामों को टालना नहीं चाहिए, क्योंकि हर एक पल (moment) स्वर्ग (Paradise) की ओर बढ़ने के रास्ते में बहुत महत्वपूर्ण होता है।

धार्मिक कामों की कठिनाई (Difficulty of Pious Deeds)

  • "ऊँची घाटी" (steep valley) का उदाहरण स्वर्ग (Paradise) तक पहुँचने के कठिन रास्ते को दर्शाता है। अच्छे कार्य (righteous deeds) आसान नहीं होते, इनकी प्राप्ति के लिए संघर्ष (struggle), सहनशीलता (patience), और बलिदान (sacrifice) की जरूरत होती है।
  • जैसे एक ऊँची घाटी को पार करने के लिए मेहनत (effort) और दृढ़ निश्चय (determination) की जरूरत होती है, वैसे ही अच्छे कर्मों की राह में भी कई कठिनाइयाँ (difficulties) होती हैं, जिन्हें सहनशीलता, धैर्य (patience), और विश्वास (faith) के साथ पार करना होता है।

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