कुरान - 90:1 सूरह अल-बलद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

1
لَآ أُقۡسِمُ بِهَٰذَا ٱلۡبَلَدِ

Transliteration: (Laaa uqsimu bihaazal balad)

1.बेशक, मैं इस शहर (मक्का) की क़सम खाता हूँ। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-बलद आयत 1 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

मक्का शहर का महत्व (Significance of the Holy City of Makkah)

मक्का की पवित्रता (The Sanctity of Makkah)
मक्का का पवित्र शहर वह सबसे प्राचीन स्थान है जिसे हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने स्थापित किया था। यह पवित्र काबा, मक़ाम-ए-इब्राहीम, और अन्य मुकद्दस स्थलों का घर है। प्राचीन काल से यहां पर हज का फ़रीज़ा अदा किया जाता रहा है। मक्का शांति और सुरक्षा का शहर है, जहां हर जीवित प्राणी के लिए अमन है। इस शहर को ऐतिहासिक और आध्यात्मिक दृष्टि से बहुत महत्व प्राप्त है, क्योंकि यह नबियों के सरदार, रसूल-ए-पाक صَلَّى اللّٰهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ का जन्मस्थान है।

मक्का की पवित्रता और रसूल-ए-पाक का संबंध (Sanctity of Makkah and Its Connection to the Holy Prophet)
मक्का का रसूल-ए-पाक صَلَّى اللّٰهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ के साथ संबंध इसकी पवित्रता को और बढ़ा देता है। मक्का की हर गली और बाजार को इतनी बड़ी तक़द्दुस (holiness) मिली कि अल्लाह तआला ने इन पर कसम खाई।

सहाबा-ए-किराम की महानता (Dignity of the Noble Companions)
अगर मक्का की गलियां और बाजार रसूल-ए-पाक صَلَّى اللّٰهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ के साथ संबंध की वजह से मुकद्दस बन गए, तो उन सहाबा-ए-किराम का दर्जा और इज़्ज़त कितनी बुलंद होगी, जिन्होंने उनके साथ रहकर उनकी खिदमत की और उनके साये की तरह उनका साथ निभाया। उनके मरतबे और इज्जत को कोई माप नहीं सकता।

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