कुरान - 90:7 सूरह अल-बलद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

7
أَيَحۡسَبُ أَن لَّمۡ يَرَهُۥٓ أَحَدٌ

Transliteration: (Ayahsabu al lam yarahooo ahad )

7.क्या उसे यह लगता है कि उसे कोई नहीं देखता [7]? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-बलद आयत 7 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

इरादों और कामों पर चिंतन (Reflection on Intentions and Deeds)

यह आयत अविश्वासियों की गलतफहमी को दूर करती है कि अल्लाह तआला उनके कामों, इरादों और ख्वाहिशों से अनजान हैं। यह एक याद दिलाने वाली आयत है कि अल्लाह हर चीज़ से पूरी तरह वाकिफ हैं—सिर्फ हमारे कर्मों से नहीं, बल्कि हमारे इरादों से भी।

मुख्य बातें (Key Points):

अल्लाह के सामने जवाबदेही (Accountability Before Allah):
यह आयत यह सवाल करती है कि क्या अविश्वासी यह सोचते हैं कि अल्लाह उनके कामों, इरादों और ख्वाहिशों पर नज़र नहीं रखते। इसका मतलब है कि अल्लाह की नज़र से कुछ भी छुपा नहीं सकता। लोग अपने कर्मों या इरादों को छुपाने की कोशिश कर सकते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि अल्लाह सब कुछ जानते हैं, यहां तक कि उनके अंदर के ख्याल भी।

धन और इरादा (Wealth and Intention):
जब कोई धन खर्च करता है, तो उसे सिर्फ खर्चे को नहीं, बल्कि इसके पीछे के इरादे को भी ध्यान में रखना चाहिए। धन को बिना उद्देश्य के या स्वार्थपूर्ण, हानिकारक उद्देश्य के लिए खर्च नहीं करना चाहिए। अच्छे इरादों से और अच्छे कारणों के लिए खर्च करना जरूरी है।

बीज और पानी का उदाहरण (The Analogy of Seed and Water):
यह आयत अच्छे खर्च को उपजाऊ मिट्टी और अच्छे इरादों को बीज के लिए पानी से तुलना करती है। जैसे एक बीज को बढ़ने के लिए उपजाऊ मिट्टी और पानी की ज़रूरत होती है, वैसे ही दान में अच्छे इरादों और सही उद्देश्य की आवश्यकता होती है। दोनों तत्वों का होना जरूरी है, ताकि परिणाम शुभ और लाभकारी हो।

उपजाऊ मिट्टी अच्छे कारणों का प्रतीक है, जबकि पानी शुद्ध, सच्चे इरादों का प्रतीक है। बिना इन दोनों के, "बीज" (यानी, दान का कार्य) फलदायक और लाभकारी नहीं हो सकता।

सीखने योग्य बातें (Lessons to Learn):

इरादा महत्वपूर्ण है (Intention is Key):
जब कोई दान दे या धन खर्च करे, तो उसे यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उसका इरादा शुद्ध हो और अल्लाह को खुश करने के लिए हो। अच्छे इरादे दान के कार्य को प्रेरित करते हैं, जिससे यह अल्लाह की नज़र में मूल्यवान और महत्वपूर्ण बनता है।

सही खर्च करना (Proper Spending):
धन को समझदारी से और योग्य कारणों पर खर्च किया जाना चाहिए। जैसे बीज को उपजाऊ ज़मीन में बोना चाहिए, वैसे ही दान को अच्छे कारणों पर ही खर्च करना चाहिए ताकि वह बढ़े और इनाम मिले।

अल्लाह से कुछ भी छुपा नहीं (Nothing is Hidden from Allah):
यह आयत यह याद दिलाती है कि अल्लाह केवल हमारे कर्मों को नहीं देखते, बल्कि हमारे इरादों को भी समझते हैं। हमारे कर्मों का मूल्य उनके इरादों पर निर्भर करता है, और यह हमें हमेशा सच्चाई और निष्ठा से काम करने की प्रेरणा देती है।

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