कुरान - 102:1 सूरह अत-तकासुर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

1
أَلۡهَىٰكُمُ ٱلتَّكَاثُرُ

Transliteration: (Al haaku mut takathur )

1.दौलत [1] की दौड़ ने तुम्हें अल्लाह से गाफ़िल [2] कर दिया है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अत-तकासुर आयत 1 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

बहस का पृष्ठभूमि (Background of the Debate)

बनी अब्द मनाफ़ और बनी सहम के बीच वंश की श्रेष्ठता को लेकर बहस हुई। दोनों पक्ष यह दावा कर रहे थे कि वे संपत्ति, व्यवसाय, मेहमाननवाज़ी, प्रतिष्ठा और संख्या में एक-दूसरे से अधिक हैं। जब संख्या में बनी अब्द मनाफ़ की बढ़त दिखी, तो बनी सहम ने सुझाव दिया कि जीवित और मृत व्यक्तियों को मिलाकर गिनती की जाए। उनका कहना था कि यदि हमारे मृतकों को भी जोड़ा जाए, तो हमारी संख्या आपसे अधिक हो जाएगी। इसके बाद वे कब्रिस्तान गए और कब्रों की ओर इशारा करते हुए कहने लगे कि अमुक व्यक्ति इतने महान थे। इसी पर यह आयत नाज़िल हुई (तफ़सीर अज़ीज़ी, रूहुल बयां)।

मौत और कब्र का ज़िक्र (Discussion of Death and Grave)

इस आयत में यह बताया गया है कि इंसान को मौत और क़ब्र की चिंता होनी चाहिए। यह चिंता क़यामत के दिन का डर, अल्लाह तआला की इताअत (आज्ञाकारिता) और उनकी याद में होनी चाहिए। जो भी चीज़ इंसान को अल्लाह और उनके प्यारे रसूल की याद से गाफ़िल कर दे, वह "लह्व" कहलाती है।

अल्हा शब्द "लह्व" से लिया गया है, जिसका अर्थ है गाफ़िल होना या लापरवाह हो जाना।

तकासुर का अर्थ (Meaning of Takathur)

तकासुर शब्द का अर्थ है "अधिकता" और यह उस समय प्रयोग होता है जब एक-दूसरे के सामने अपनी अधिकता को जताया जाए या उसकी इच्छा की जाए।

  1. अगर यह शुक्र (आभार) के रूप में हो तो यह इबादत मानी जाती है।
  2. लेकिन अगर यह घमंड और दिखावे के लिए हो, चाहे वह धन, ज्ञान, प्रतिष्ठा या अच्छे कर्मों के बारे में हो, तो यह गुनाह है।

दीन की अधिकता की इच्छा बेहतरीन चीज़ है, लेकिन दुनिया की अधिकता की लालसा एक बुरी चीज़ है, ख़ासकर जब यह अल्लाह तआला से ग़फलत का कारण बन जाए। इस आयत में "तकासुर" इसी नकारात्मक भावना को व्यक्त करता है।

कब्रिस्तान की घटना (Incident at the Cemetery)

बनी अब्द मनाफ़ और बनी सहम कब्रिस्तान गए और मृतकों की कब्रों की ओर इशारा करते हुए कहने लगे कि ये हमारे बड़े और महान लोग थे। उन्होंने अपनी संख्या बढ़ाने के लिए मृतकों को गिनना शुरू कर दिया। इस पर कुरआन की यह आयत नाज़िल हुई, जिसमें बताया गया कि इस तरह की संख्या की होड़ इंसान को ग़फलत में डाल देती है।

मुख्य संदेश (Main Message)

  1. मौत और आख़िरत का ख़्याल: यह आयत इंसान को मौत और आख़िरत के दिन के बारे में सोचने की हिदायत देती है।
  2. ग़फलत से बचना: दुनिया की अधिकता और दिखावे की लालसा इंसान को ग़ाफ़िल कर देती है।
  3. तकासुर का परिणाम: यह घमंड और दिखावे की भावना इंसान को अल्लाह की याद और आज्ञाकारिता से दूर कर देती है।
  4. न्याय और कर्म: आख़िरत में हर इंसान के कर्मों का हिसाब होगा, चाहे वे जीवित हों या मृत।

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