Transliteration: (Kalla sawfa ta'lamoon )
ईमान को मजबूरी में कबूल करना (Forced Acceptance of Faith)
यह आयत चेतावनी देती है कि जब काफ़िरों पर मुसीबतें, जैसे अकाल या अन्य सजा, डाली जाएंगी, या जब मुसलमानों को उन पर विजय प्राप्त होगी, तो काफ़िर मजबूरी में इस्लाम कबूल करेंगे। हालांकि, यह कबूल करना डर या दबाव के तहत होगा, न कि सच्चे विश्वास के कारण।
उनके लिए बेहतर होगा अगर वे आज इस्लाम को खुशी से स्वीकार कर लें, क्योंकि ऐसा करने से उनका दर्जा ऊँचा होगा और वे अल्लाह की दया के करीब होंगे। इस जीवन में सच्चे ईमान को अपनाना उन्हें असली सम्मान और सफलता की ओर ले जाएगा।
मौत के समय ईमान का कबूल करना व्यर्थ है (The Futility of Belief at the Time of Death)
आयत यह भी संकेत देती है कि मौत के समय, जब कोई व्यक्ति सजा के फरिश्तों को देखेगा, तब इस्लाम को कबूल करना कोई फायदा नहीं होगा। उस समय, ईमान को कबूल करना मजबूरी और निस्संवेदनशील होगा, और इसलिए यह उन्हें उनके पिछले कर्मों के परिणाम से नहीं बचा पाएगा। सच्चे तौबा और ईमान का समय अब बीत चुका होगा।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat