Transliteration: (Fa-iza sawwaituhoo wa nafakhtu feehi mir roohee faqa'oo lahoo saajideen)
"फिर जब मैं उसे पूरी तरह बना लूँ और उसमें अपनी रूह फूँक दूँ [125], तो तुम उसके आगे सजदे में गिर पड़ना [126]!"
हज़रत आदम का जिस्मे मुबारक चालीस साल में तय्यार हुआ, फिर उसमें रूह फूँकी गई। बुज़ुर्गों के दम करने (फूँकने) का शरई सुबूत भी इसी आयत से साबित है।
यह सजदा इबादत का नहीं बल्कि अल्लाह के हुक्म से हज़रत आदम की ताज़ीम व इज़्ज़त के लिए था।
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