कुरान - 38:1 सूरह साद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

1
صٓۚ وَٱلۡقُرۡءَانِ ذِي ٱلذِّكۡرِ

Transliteration: (Saaad; wal-Qur-aani ziz zikr)

साद [1]। नसीहत वाले क़ुरआन की क़सम! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह साद आयत 1 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह साद तफ़सीर - आयत 1

"साद [1]। नसीहत वाले क़ुरआन की क़सम!"

[1] हर्फ़े साद और अज़ीमुश्शान क़ुरआन की अहमियत

सूरह की इब्तिदा हर्फ़ "साद" से हुई है, जो कि हुरूफ़-ए-मुक़त्तआत में से है। ये इलाही रम्ज़िया अस्रार हैं जिनका हक़ीक़ी इल्म अल्लाह और उसके रसूल ﷺ ही को है। इनका मक़सद सामईन को मुतवज्जेह करना और क़ुरआन मजीद के एजाज़ व यकताई को उजागर करना है।

"ज़िज़-ज़िक्र" (नसीहत व शर्फ़ वाला) से मुराद यह है कि क़ुरआन मजीद को आलमगीर शोहरत, बुलंदी और अज़ीम शरफ़ हासिल है। तारीख़े इन्सानी में किसी आसमानी किताब को वह मुक़द्दस मक़ाम, हिफ़्ज़, और दिलों में ताज़ीम हासिल नहीं हुई जो क़ुरआन मजीद को हासिल है।

यह मुक़द्दस किताब एक ज़िंदा मोजिज़ा है, जिसे हर दौर में सीनों में महफ़ूज़ रखा गया और जिसकी तिलावत से रूहें तरोताज़ा होती हैं।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now