कुरान - 38:3 सूरह साद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

3
كَمۡ أَهۡلَكۡنَا مِن قَبۡلِهِم مِّن قَرۡنٖ فَنَادَواْ وَّلَاتَ حِينَ مَنَاصٖ

Transliteration: (Kam ahlaknaa min qablihim min qarnin fanaadaw wa laata heena manaas)

हमने उनसे पहले कितनी ही क़ौमों को हलाक कर दिया [4], तो वे चीख़ उठे जबकि बचने का कोई वक़्त न था [5]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह साद आयत 3 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह साद तफ़सीर - आयत 3

"हमने उनसे पहले कितनी ही क़ौमों को हलाक कर दिया [4], तो वे चीख़ उठे जबकि बचने का कोई वक़्त न था [5]!"

[4] मुतकब्बिर क़ौमों का दर्दनाक अंजाम

इस आयत में माज़ी की उन सरकश क़ौमों का ज़िक्र है जिन्हें अंबिया की तकज़ीब और अपने तकब्बुर के सबब तबाह व बर्बाद कर दिया गया। वे दुनियावी तौर पर ताक़तवर थीं मगर अल्लाह की पकड़ से न बच सकीं।

[5] अज़ाब के वक़्त फ़रियाद की बे-सूदी

जब अल्लाह का अज़ाब उन पर आ टूटा, तो वे चीख़ने-चिल्लाने और पनाह माँगने लगे। मगर उस वक़्त बहुत देर हो चुकी थी। जब अज़ाब शुरू हो जाए तो तौबा का दरवाज़ा बंद हो जाता है—जैसे मौसम गुज़र जाने के बाद बीज बोने से कोई फल नहीं मिलता।

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