कुरान - 38:6 सूरह साद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

6
وَٱنطَلَقَ ٱلۡمَلَأُ مِنۡهُمۡ أَنِ ٱمۡشُواْ وَٱصۡبِرُواْ عَلَىٰٓ ءَالِهَتِكُمۡۖ إِنَّ هَٰذَا لَشَيۡءٞ يُرَادُ

Transliteration: (Wantalaqal mala-u minhum anim shoo wasbiroo 'alaaa aalihatikum innna haazaa lashai 'uny yuraad)

और उनमें से सरदार यह कहते हुए चल पड़े [8] कि चलो और अपने माबूदों पर जमे रहो [9], बेशक यह कोई सोची-समझी बात है [10]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह साद आयत 6 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह साद तफ़सीर - आयत 6

"और उनमें से सरदार यह कहते हुए चल पड़े [8] कि चलो और अपने माबूदों पर जमे रहो [9], बेशक यह कोई सोची-समझी बात है [10]!"

[8] अबू तालिब की मजलिस से सरदारों की वापसी

अबू तालिब के सामने हुज़ूर ﷺ की हक़्क़ानियत और दो-टोक मौक़फ़ के सामने बेबस होकर मक्का के सरदार नाकामी और ग़ुस्से के आलम में वापस चल पड़े।

[9] बातिल माबूदों पर हठधर्मी

वे अवाम को भड़काने लगे कि "अपने बुतों की इबादत पर डटे रहो"। यह उनकी अक़्ली शिकस्त का इक़रार था कि उनके पास कोई दलील न थी, सिर्फ़ बाप-दादा की रस्म और ज़िद थी।

[10] नबूवत की अज़ीम मेहनत पर बदगुमानी

आला हज़रत के इफ़ादात की रौशनी में, मुशरिकीन यह कहने लगे कि हुज़ूर ﷺ की इस मुसलसल तब्लीग़ के पीछे (नौजुबिल्लाह) कोई दुनियावी मक़सद या सरदारी की चाहत है। हालाँकि हुज़ूर ﷺ सिर्फ़ रज़ा-ए-इलाही और उम्मत की ख़ैरख़्वाही के लिए दीन की दावत दे रहे थे।

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