Transliteration: (Wantalaqal mala-u minhum anim shoo wasbiroo 'alaaa aalihatikum innna haazaa lashai 'uny yuraad)
"और उनमें से सरदार यह कहते हुए चल पड़े [8] कि चलो और अपने माबूदों पर जमे रहो [9], बेशक यह कोई सोची-समझी बात है [10]!"
अबू तालिब के सामने हुज़ूर ﷺ की हक़्क़ानियत और दो-टोक मौक़फ़ के सामने बेबस होकर मक्का के सरदार नाकामी और ग़ुस्से के आलम में वापस चल पड़े।
वे अवाम को भड़काने लगे कि "अपने बुतों की इबादत पर डटे रहो"। यह उनकी अक़्ली शिकस्त का इक़रार था कि उनके पास कोई दलील न थी, सिर्फ़ बाप-दादा की रस्म और ज़िद थी।
आला हज़रत के इफ़ादात की रौशनी में, मुशरिकीन यह कहने लगे कि हुज़ूर ﷺ की इस मुसलसल तब्लीग़ के पीछे (नौजुबिल्लाह) कोई दुनियावी मक़सद या सरदारी की चाहत है। हालाँकि हुज़ूर ﷺ सिर्फ़ रज़ा-ए-इलाही और उम्मत की ख़ैरख़्वाही के लिए दीन की दावत दे रहे थे।
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