कुरान - 38:7 सूरह साद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

7
مَا سَمِعۡنَا بِهَٰذَا فِي ٱلۡمِلَّةِ ٱلۡأٓخِرَةِ إِنۡ هَٰذَآ إِلَّا ٱخۡتِلَٰقٌ

Transliteration: (Maa sami'naa bihaazaa fil millatil aakhirati in haazaaa illakh tilaaq)

हमने पिछली मिल्लत में भी यह नहीं सुना [11], यह तो बस एक मनघड़ंत बात है [12]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह साद आयत 7 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह साद तफ़सीर - आयत 7

"हमने पिछली मिल्लत में भी यह नहीं सुना [11], यह तो बस एक मनघड़ंत बात है [12]!"

[11] तस्लीस से ग़लत क़ियास

मुशरिकीन ने कहा कि हमने ज़माने के ऐतबार से क़रीबी मज़हब (दीने ईसवी) में भी ख़ालिस तौहीद नहीं सुनी, क्योंकि ईसाइयों ने तस्लीस (तीन ख़ुदाओं) का अक़ीदा गढ़ लिया था। उनकी यह मंतिक़ बिल्कुल बातिल थी क्योंकि पिछली तहरीफ़ात को दलील बनाकर हक़ का इन्कार नहीं किया जा सकता।

[12] इफ़्तिरा और बोहतान का इल्ज़ाम

उन्होंने इस्लाम को एक "नई मनघड़ंत बात" कहा। हालाँकि तमाम अंबिया का दीन हमेशा से तौहीद ही रहा है, मगर शैतानी बहकावे ने लोगों को बातिल की तरफ़ भटका दिया था।

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