Transliteration: (Am'indahum khazaaa 'inu rahmati Rabbikal 'Azeezil Wahhab)
"क्या उनके पास आपके इज़्ज़त वाले, बड़े दाता रब की रहमत के ख़ज़ाने हैं [16]?"
यह आयत मुशरिकीन की जहालत पर तंज़िया मलामत करती है कि क्या अल्लाह के ख़ज़ाने उनके इख़्तियार में हैं कि वे फ़ैसला करें कि किसे नबूवत मिले?
नबूवत महज़ अता-ए-इलाही है, जो किसी की ज़ाती कोशिश, माल या ख़ानदान से हासिल नहीं होती। नबूवत हमेशा वहबी होती है, जबकि विलायत वहबी भी होती है और कसब से भी मिलती है। अल्लाह तआला ही अज़ीज़ और वहाब है और जिसे चाहता है अपनी रहमत से नवाज़ता है।
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