कुरान - 38:8 सूरह साद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

8
أَءُنزِلَ عَلَيۡهِ ٱلذِّكۡرُ مِنۢ بَيۡنِنَاۚ بَلۡ هُمۡ فِي شَكّٖ مِّن ذِكۡرِيۚ بَل لَّمَّا يَذُوقُواْ عَذَابِ

Transliteration: ('A-unzila 'alaihiz zikru min baininaa; bal hum fee shakkin min Zikree bal lammaa yazooqoo 'azaab)

क्या हम सब में से सिर्फ़ उसी पर नसीहत (क़ुरआन) उतारी गई [13]? बल्कि वे मेरी नसीहत की तरफ़ से शक में हैं [14], बल्कि उन्होंने अभी तक मेरा अज़ाब नहीं चखा [15]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह साद आयत 8 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह साद तफ़सीर - आयत 8

"क्या हम सब में से सिर्फ़ उसी पर नसीहत (क़ुरआन) उतारी गई [13]? बल्कि वे मेरी नसीहत की तरफ़ से शक में हैं [14], बल्कि उन्होंने अभी तक मेरा अज़ाब नहीं चखा [15]!"

[13] नबी-ए-रहमत ﷺ से हसद

मक्का के दौलतमंद सरदार तकब्बुर और हसद में कहते थे कि क़ुरआन किसी बड़े मालदार सरदार पर उतरने के बजाय मुहम्मद ﷺ पर क्यों उतरा। अल्लाह तआला ने रिसालत के लिए माल व दौलत के बजाय पाकीज़ा किरदार और हक़्क़ानियत को मुंतख़ब फ़रमाया।

[14] शक और बदलते इल्ज़ामात

उनका शक किसी दलील पर नहीं बल्कि हठधर्मी पर मबनी था। कभी वे क़ुरआन को शायरी कहते, कभी जादू, और कभी झूठा अफ़साना।

[15] अज़ाब न चखने की ढिठाई

उनकी सरकशी की असल वजह यह थी कि उन्होंने अभी तक अल्लाह का अज़ाब नहीं चखा था। जैसे फ़िरऔन ने ग़र्क़ होते वक़्त ईमान का इक़रार किया, वैसे ही ये लोग भी अज़ाब देखकर झुकने पर मजबूर होंगे।

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