कुरान - 38:2 सूरह साद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

2
بَلِ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ فِي عِزَّةٖ وَشِقَاقٖ

Transliteration: (Balil lazeena kafaroo fee 'izzatinw wa shiqaaq)

बल्कि काफ़िर झूठे तकब्बुर [2] और खुली मुख़ालिफ़त [3] में पड़े हैं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह साद आयत 2 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह साद तफ़सीर - आयत 2

"बल्कि काफ़िर झूठे तकब्बुर [2] और खुली मुख़ालिफ़त [3] में पड़े हैं।"

[2] बातिल घमंड ब-तौर सज़ा

यह आयत वाज़ेह करती है कि काफ़िरों का तकब्बुर और अकड़ कोई हक़ीक़ी इज़्ज़त नहीं, बल्कि इलाही सज़ा और महरूमी की अलामत है। उनका घमंड बातिल और सरकशी पर मबनी है जो उन्हें अल्लाह और उसके रसूल ﷺ की दुश्मनी की तरफ़ ले जाता है।

जैसा कि क़ुरआन मजीद में फ़रमाया गया: "इज़्ज़त तो अल्लाह, उसके रसूल और ईमान वालों ही के लिए है" (सूरह अल-मुनाफ़िक़ून: 8)। अल्लाह की इताअत से बाहर जो भी इज़्ज़त का दावा किया जाए वह खोखला और रुसवाई का सबब है।

[3] हक़ की मुसलसल मुख़ालिफ़त

उनकी अंधी दुश्मनी और ज़िद उन्हें क़ुरआन मजीद की हक़्क़ानियत क़बूल करने से रोकती है। इसी हठधर्मी और तकब्बुर की वजह से वे वाज़ेह निशानियाँ देखने के बावजूद ईमान नहीं लाते।

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