Transliteration: (Min nutfatin khalaqahoo faqaddarah. )
इस आयत में यह स्पष्ट किया गया है कि इंसान का प्रारंभ एक छोटे से बीज, यानी ऩुत्फ़ा (गर्भ में स्थित शुक्राणु और अंडाणु) से होता है। इस ऩुत्फ़ा से अल्लाह तआला इंसान का निर्माण करते हैं और उसके जीवन के सभी पहलुओं को, जैसे उसकी शारीरिक संरचना, जीवनकाल, और भाग्य, निर्धारित करते हैं। इस संदर्भ में, शारीरिक अंगों और उनके कार्यों को उचित अनुपात में और सही अनुमान के अनुसार अल्लाह तआला द्वारा दिया जाता है। जैसे कि क़ुरआन में भी उल्लेख किया गया है, कि यह सब एक दिव्य योजना के तहत निर्धारित होता है।
इसमें, शरीर के अंगों और उनकी ताकत को उचित अनुमान के अनुसार दिया गया है। हर अंग का आकार, उसकी ताकत, और उसकी कार्यक्षमता अल्लाह तआला के द्वारा निर्धारित होती है। इसी तरह, जीवन के अन्य पहलुओं को भी उसी तरह सही और संतुलित रूप से वितरित किया गया है, जैसे कि आजीविका, मृत्यु, संपत्ति, सम्मान, और अन्य आशीर्वाद। प्रत्येक व्यक्ति के लिए उसकी क्षमता और आवश्यकता के अनुसार, ये सभी आशीर्वाद निश्चित किए गए हैं। यह दिव्य वितरण दर्शाता है कि सभी चीज़ें अल्लाह की मर्जी और उसकी योजना के अनुसार चलती हैं, और हर व्यक्ति को उसका भाग्य उसी अनुपात में मिलता है, जो उसके लिए निर्धारित किया गया है।
यह दोनों विचार इस बात को दर्शाते हैं कि हम जो भी हैं—हमारी शारीरिक स्थिति, मानसिक क्षमता, और जीवन के बाकी पहलु—यह सब अल्लाह तआला की योजना के अनुसार और उसकी मर्जी से निर्धारित होता है।
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