Transliteration: (Thumma amatahu fa-aqbarah)
मोमिन की मृत्यु भी अल्लाह तआला की ओर से एक इनाम है क्योंकि इसके द्वारा वह दुनिया की परेशानियों से मुक्त होकर अल्लाह तआला से मिलने का सौभाग्य प्राप्त करता है। मोमिन की मृत्यु दुनिया की मुश्किलों से आज़ादी का दिन होती है, जबकि काफिर की मृत्यु कैद का दिन होती है।
याद रहे कि सबसे पहला कत्ल हाबील का हुआ था, जिसे क़ाबील ने अंजाम दिया था।
अल्लाह तआला ने उसे एक कौवे के ज़रिए दफ़नाने का तरीका सिखाया। जब हज़रत आदम (अलैहिस्सलाम) का इंतेकाल हुआ, तो फरिश्ते उनके बच्चों के पास स्वर्गीय काफ़ूर (सुगंधित पदार्थ) लेकर आए और उन्हें नहलाकर दफ़न किया, ताकि लोग इन तरीकों को सीख सकें।
ध्यान दें कि मृत व्यक्ति को क़ब्र में दफ़न करना उसके लिए इज़्ज़त का ज़रिया है, क्योंकि इंसान की शुरुआत मिट्टी से हुई और उसका अंत भी मिट्टी में ही होना चाहिए। इसके अलावा, बुरी चीजों को जलाया जाता है, जबकि कब्र मृत व्यक्ति की यादों को सुरक्षित रखती है।
अच्छी चीज़ों को ज़मीन में अमानत के तौर पर दफ़न किया जाता है। जिस तरह पेड़ों की जड़ें ज़मीन में होती हैं और उनकी शाखाएं ऊपर फैलती हैं, और जिस तरह घर की बुनियाद ज़मीन के अंदर होती है और उसकी इमारत ऊपर होती है, उसी तरह मृत मोमिन ज़मीन में होते हैं और जीवित लोग उनके ऊपर रहते हैं।
शव को जलाने से ये तमाम लाभ नष्ट हो जाते हैं। इसलिए मृतकों को दफ़न करना अल्लाह तआला की नेमतों में से एक माना जाता है।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat