Transliteration: (Amma manis taghnaa)
इससे हमें यह सिखने को मिलता है कि नबी-ए-पाक ﷺ से खुद को स्वतंत्र समझना कुफ्र का सबसे बुरा रूप है। हर कोई नबी ﷺ का मुहताज है।
काफ़िरों ने न सिर्फ़ अपने आप को अल्लाह तआला से स्वतंत्र समझा था, बल्कि नबी ﷺ के प्रति भी उनकी उदासीनता थी। इस रवैये की अल्लाह तआला ने कड़ी निंदा की।
इसका मतलब है: "ऐ मेरे प्यारे नबी ﷺ! तुम उन क़ुरैश के सरदारों की परवाह क्यों करते हो, जो तुम्हारे प्रति इतने लापरवाह और उदासीन हैं? तुम्हें तो उन गरीब भक्तों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, जो हमेशा खुद को तुम्हारे आज्ञाकारी ख़ादिम समझते हैं।"
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