Transliteration: (Aw yazzakkaru fatanfa 'ahuz zikraa.)
एक बार, नबी-ए-पाक ﷺ क़ुरैश के सरदारों को इस्लाम की ओर बुला रहे थे। इस दौरान, हज़रत अब्दुल्लाह बिन उम्मे मक्तूम (रज़ियल्लाहु अन्हु), जो अंधे सहाबी थे, आ पहुंचे। उन्होंने बार-बार नबी ﷺ से दुआ की कि वह उन्हें वह सिखाएं जो अल्लाह तआला ने मुरशिद किया है।
इस हस्तक्षेप ने नबी ﷺ को इस हद तक नाराज़ किया कि उनके मबारक चेहरे पर नराज़गी के असर दिखाई देने लगे। हज़रत अब्दुल्लाह से बिना कोई जवाब दिए, नबी ﷺ अपने घर की ओर चले गए। और इसी मौके पर यह आयतें उतरीं।
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