कुरान - 80:4 सूरह अबस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

4
أَوۡ يَذَّكَّرُ فَتَنفَعَهُ ٱلذِّكۡرَىٰٓ

Transliteration: (Aw yazzakkaru fatanfa 'ahuz zikraa.)

4.या वह ध्यान लगाए, और उसे तौबा की याददिहानी फायदेमंद हो। [3] (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अबस आयत 4 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

अवतरण की पृष्ठभूमि (Background of Revelation)

एक बार, नबी-ए-पाक ﷺ क़ुरैश के सरदारों को इस्लाम की ओर बुला रहे थे। इस दौरान, हज़रत अब्दुल्लाह बिन उम्मे मक्तूम (रज़ियल्लाहु अन्हु), जो अंधे सहाबी थे, आ पहुंचे। उन्होंने बार-बार नबी ﷺ से दुआ की कि वह उन्हें वह सिखाएं जो अल्लाह तआला ने मुरशिद किया है।

इस हस्तक्षेप ने नबी ﷺ को इस हद तक नाराज़ किया कि उनके मबारक चेहरे पर नराज़गी के असर दिखाई देने लगे। हज़रत अब्दुल्लाह से बिना कोई जवाब दिए, नबी ﷺ अपने घर की ओर चले गए। और इसी मौके पर यह आयतें उतरीं।

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