Transliteration: (An jaa-ahul 'a-maa)
उनका आप ﷺ के पास आना एक इबादत है, और इबादत पर ख़ुश होना चाहिए, न कि नाराज़। इसके अलावा, वह अंधे सहाबी बड़ी मुश्किल से आप ﷺ तक पहुंचे। चूंकि उनकी आँखों की रोशनी नहीं थी, वह किसी से आप ﷺ का पता नहीं पूछ सकते थे—वरना काफ़िर उन्हें रास्ता दिखा देते। साथ ही, अपनी नाबीना होने की वजह से, वह आप ﷺ के रोशन चेहरे पर नराज़गी के आसार भी नहीं देख सके।
जो आप ﷺ की शदीद मोहब्बत में अंधे हो गए, वह मजलिस के अदब, बिना इजाज़त बोलने और दीगर रस्म-ओ-रिवाज के अहकाम से पूरी तरह माफ़ हैं। क़ानून उन लोगों पर लागू होता है जो अकलमंद होते हैं, न कि उन पर जो मोहब्बत में खो गए। जब मिस्र की औरतों ने हज़रत यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) का ग़ैरमामूली हुस्न देखा, तो उन्होंने अपने हाथ काट लिए, मगर यह गुनाह नहीं समझा गया। इसी तरह, कुछ मामलों में मोहब्बत रस्मी क़वानीन से ऊपर होती है।
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