Transliteration: (Khuzoohu fa'tiloohu ilaa sawaaa'il Jaheem)
"(हुक्म होगा) 'उसे पकड़ो [48] और घसीटते हुए भड़कती आग के बीचों-बीच धकेल दो [49]'।"
यह हुक्म काफ़िर और मुनकिर के बारे में होगा। हिसाब-किताब के मुकम्मल होने के बाद मैदान-ए-महशर में फ़रिश्तों को यह हुक्म दिया जाएगा कि इस मुजरिम को ज़िल्लत के साथ पकड़ लो।
इससे यह हक़ीक़त मालूम होती है कि अगर कोई गुनहगार मोमिन अपने गुनाहों की सज़ा पाने के लिए दोज़ख़ में जाएगा, तो उसे इस तरह रुसवा करके घसीटा नहीं जाएगा। यह ज़िल्लत, रुसवाई और मुँह के बल घसीटना सिर्फ़ काफ़िरों के लिए मख़सूस सज़ा है।
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