कुरान - 44:49 सूरह अद-दुखान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

49
ذُقۡ إِنَّكَ أَنتَ ٱلۡعَزِيزُ ٱلۡكَرِيمُ

Transliteration: (Zuq innaka antal 'azeezul kareem)

"चख! हाँ, बेशक तू ही तो बड़ा इज़्ज़त वाला, मुअज़्ज़म [50] बनता था"। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अद-दुखान आयत 49 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अद-दुख़ान तफ़सीर - आयत 49

"'चख! हाँ, बेशक तू ही तो बड़ा इज़्ज़त वाला, मुअज़्ज़म [50] बनता था'।"

[50] सरकशों की तज़हीक और शरई नुक्ता

इससे दो अहम फ़िक़्ही व इल्मी बातें मालूम हुईं:

  1. दीन के दुश्मन की ज़िल्लत और तज़हीक (मज़ाक़) करना जाइज़ है।

  2. इस तरह की डांट-डपट और मलामत में जो अल्फ़ाज़ कहे जाएं वे हक़ीक़ी ख़बर देने के लिए नहीं होते; वर्ना उसमें सच और झूठ का एहतिमाल होता।

जिस तरह हुज़ूर अकरम ﷺ हौज़-ए-कौसर पर मुनाफ़िक़ों को हक़ारत के तौर पर फ़रमाएंगे कि “ये मेरे सहाबा हैं” (ताकि उनकी हक़ीक़त वाज़ेह हो जाए)। चूँकि अबू जहल दुनिया में तकब्बुर से कहता था कि “मैं सारे मक्के में सबसे ज़्यादा इज़्ज़तदार और मुअज़्ज़म हूँ”, इसलिए फ़रिश्ते उसे ताना मारते हुए और ज़लील करते हुए ये अल्फ़ाज़ कहेंगे।

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