Transliteration: (Fartaqib innahum murta qiboon)
"तो आप इंतिज़ार फ़रमाइए; बेशक वे भी इंतिज़ार करने वाले [63] हैं।"
इस आयत में हुज़ूर अकरम ﷺ और मुनकिरीन दोनों को मुख़ातब करके फ़रमाया गया कि दोनों तरफ़ इंतिज़ार है—हुज़ूर ﷺ सब्र के साथ अल्लाह की मदद और फ़तह के मुंतज़िर रहें, और काफ़िर अपनी हलाकत और अज़ाब के आने का इंतिज़ार करें। अनक़रीब हक़ ग़ालिब आकर रहेगा और बातिल मिट जाएगा।
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