Transliteration: (Fadlam mir rabbik; zaalika huwal fawzul 'azeem)
"आपके रब के फ़ज़्ल [60] के तौर पर; यही सबसे बड़ी कामयाबी है।"
यह आयत सिखाती है कि जहन्नम से बचना और जन्नत की दायमी नेअमतें पाना किसी इंसान की अपनी ताक़त या आमाल के बलबूते पर नहीं बल्कि ख़ालिस अल्लाह तआला के फ़ज़्ल व करम से मुमकिन होता है। ईमान और तक़्वा भी उसी के फ़ज़्ल से नसीब होता है।
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