कुरान - 44:56 सूरह अद-दुखान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

56
لَا يَذُوقُونَ فِيهَا ٱلۡمَوۡتَ إِلَّا ٱلۡمَوۡتَةَ ٱلۡأُولَىٰۖ وَوَقَىٰهُمۡ عَذَابَ ٱلۡجَحِيمِ

Transliteration: (Laa yazooqoona feehal mawtaa illal mawtatal oolaa wa waqaahum 'azaabal jaheem)

वे वहाँ पहली मौत के सिवा कभी मौत का मज़ा न चखेंगे [59], और अल्लाह उन्हें दोज़ख़ के अज़ाब से बचा लेगा। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अद-दुखान आयत 56 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अद-दुख़ान तफ़सीर - आयत 56

"वे वहाँ पहली मौत के सिवा कभी मौत का मज़ा न चखेंगे [59], और अल्लाह उन्हें दोज़ख़ के अज़ाब से बचा लेगा।"

[59] आख़िरत में मौत का दायमी ख़ात्मा

जो मौत उन्होंने दुनिया में चख ली थी, उसके बाद जन्नत में उनके लिए कभी कोई दूसरी मौत नहीं होगी। अगरचे काफ़िरों को भी दोज़ख़ में मौत नहीं आएगी, लेकिन उनकी वह ज़िंदगी मौत से भी बदतर और दर्दनाक होगी। इसलिए जन्नत वालों की इस बे-मौत हयात को ख़ास फ़ज़ीलत के तौर पर ज़िक्र फ़रमाया गया। जैसा कि इरशाद है: “फिर वह उसमें न मरेगा और न जिएगा” (सूरह अल-आला 87:13)।

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