Transliteration: (Yad'oona feehaa bikulli faakihatin aamineen)
"वे वहाँ हर क़िस्म के फल अम्न व इत्मीनान [58] से तलब करेंगे।"
जन्नत में उन्हें यह इख़्तियार होगा कि वे सिर्फ़ एक इशारे या ख़्वाहिश से जो फल चाहें मँगवा लें, किसी क़िस्म की रोक-टोक नहीं होगी। वहाँ न फलों के ख़त्म होने का कोई अंदेशा होगा और न ही अपनी ज़िंदगी के ख़त्म होने का ख़ौफ़—वहाँ की हर नेअमत हमेशा रहने वाली और दायमी होगी।
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