कुरान - 44:53 सूरह अद-दुखान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

53
يَلۡبَسُونَ مِن سُندُسٖ وَإِسۡتَبۡرَقٖ مُّتَقَٰبِلِينَ

Transliteration: (Yalbasoona min sundusinw wa istabraqim mutaqaabileen)

बारीक रेशम और दबीज़ कमख़्वाब [54] के लिबास पहने होंगे, एक-दूसरे के आमने-सामने [55] बैठे होंगे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अद-दुखान आयत 53 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अद-दुख़ान तफ़सीर - आयत 53

"बारीक रेशम और दबीज़ कमख़्वाब [54] के लिबास पहने होंगे, एक-दूसरे के आमने-सामने [55] बैठे होंगे।"

[54] जन्नत के मुअज़्ज़म लिबास

वे रेशम के मुतअद्दिद ख़ूबसूरत लिबास पहने होंगे। बारीक और नफ़ीस रेशम को अरबी में ‘सुंदुस’ कहा जाता है, जबकि गाढ़े और ज़र्क़-बर्क़ रेशम (कमख़्वाब) को ‘इस्तबरक़’ या महरूक़ कहा जाता है।

[55] आमने-सामने बैठने का अंदाज़

इसका मतलब यह है कि वे एक हलक़े (घेरे) में आमने-सामने रुख़ करके इज़्ज़त व उल्फ़त के साथ बैठेंगे, ताकि किसी की पीठ किसी की तरफ़ न हो—बिल्कुल उसी तरह जिस तरह वे दुनिया में ज़िक्र-ओ-फ़िक्र की मुक़द्दस महफ़िलों में बा-अदब बैठा करते थे।

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