कुरान - 7:117 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

117
۞وَأَوۡحَيۡنَآ إِلَىٰ مُوسَىٰٓ أَنۡ أَلۡقِ عَصَاكَۖ فَإِذَا هِيَ تَلۡقَفُ مَا يَأۡفِكُونَ

Transliteration: (Wa awhainaaa ilaa Moosaaa an alqi 'asaaka fa izaa hiya talqafu maa ya'fikoon)

और हमने मूसा को वह़ी भेजी कि अपना अस़ा डाल दो। तो वह उनके झूठे करतबों को निगलने लगा [117] (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 117 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-आ'राफ़ – आयत 117 की तफ़्सीर

 

✅ हक़ की फ़तह और झूठ की शिकस्त

अल्लाह के हुक्म से मूसा अलैहिस्सलाम ने अपना अस़ा फेंका, तो वह एक ज़िंदा अजदहा बन गया जिसने जादूगरों के सारे छल और झूठ को निगल लिया। इससे साबित हो गया कि उनका जादू महज़ धोखा और फ़रेब था, जबकि अल्लाह के मोजिज़ात हक़ीक़ी और ग़ालिब हैं।

यह अस़ा जो पहले बेजान था, अब साँप की शक्ल में ज़िंदा हरकत करने लगा। यह बताता है कि जब किसी चीज़ को अल्लाह के हुक्म से नई शक्ल दी जाती है तो वह उसी रूप की खूबियों के साथ नज़र आती है। जैसे जिब्रील अलैहिस्सलाम इंसानी शक्ल में आए और इंसानों की तरह पेश आए, या मलकल-मौत पर चोट पड़ने पर वह दर्द महसूस करते हैं। इसी तरह हज़रत मुहम्मद ﷺ, जो असल में नूर हैं, उन्होंने भी इंसानों की तरह खाना खाया, पिया, रोज़े रखे और शादी की।

यह आयत खूबसूरती से दिखाती है कि हक़ हमेशा बातिल को निगल जाता है, चाहे वह ज़ाहिरी हो या रूहानी।

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