और हमने मूसा को वह़ी भेजी कि अपना अस़ा डाल दो। तो वह उनके झूठे करतबों को निगलने लगा [117]
अल्लाह के हुक्म से मूसा अलैहिस्सलाम ने अपना अस़ा फेंका, तो वह एक ज़िंदा अजदहा बन गया जिसने जादूगरों के सारे छल और झूठ को निगल लिया। इससे साबित हो गया कि उनका जादू महज़ धोखा और फ़रेब था, जबकि अल्लाह के मोजिज़ात हक़ीक़ी और ग़ालिब हैं।
यह अस़ा जो पहले बेजान था, अब साँप की शक्ल में ज़िंदा हरकत करने लगा। यह बताता है कि जब किसी चीज़ को अल्लाह के हुक्म से नई शक्ल दी जाती है तो वह उसी रूप की खूबियों के साथ नज़र आती है। जैसे जिब्रील अलैहिस्सलाम इंसानी शक्ल में आए और इंसानों की तरह पेश आए, या मलकल-मौत पर चोट पड़ने पर वह दर्द महसूस करते हैं। इसी तरह हज़रत मुहम्मद ﷺ, जो असल में नूर हैं, उन्होंने भी इंसानों की तरह खाना खाया, पिया, रोज़े रखे और शादी की।
यह आयत खूबसूरती से दिखाती है कि हक़ हमेशा बातिल को निगल जाता है, चाहे वह ज़ाहिरी हो या रूहानी।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
सूरह अल-आराफ आयत 117 तफ़सीर