कुरान - 7:206 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

206
۩ إِنَّ ٱلَّذِينَ عِندَ رَبِّكَ لَا يَسۡتَكۡبِرُونَ عَنۡ عِبَادَتِهِۦ وَيُسَبِّحُونَهُۥ وَلَهُۥ يَسۡجُدُونَۤ

Transliteration: (Innal lazeena 'inda Rabbika laa yastakbiroona 'an 'ibaadatihee wa yusabbihoonahoo wa lahoo yasjudoon(make sajda))

निश्चित ही, जो लोग तुम्हारे रब के पास हैं [463] वे उसकी पूजा पर घमंड नहीं करते, बल्कि उसे महिमामय ठहराते हैं और उसी के सामने सिज़दा करते हैं (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 206 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-आराफ़ – आयत 206 की तफ़्सीर

 

✅ [463] निरंतर नम्र पूजा में फ़रिश्ते

यह आयत उन फ़रिश्तों का ज़िक्र करती है जो अल्लाह के नज़दीक हैं, बताती है कि वे कभी अपनी पूजा पर अहंकार नहीं करते।
अपनी उच्च स्थिति और दिव्य निकटता के बावजूद, वे लगातार अल्लाह का स्मरण करते हैं, उसे महिमामय ठहराते और नम्रता से सिज़दा करते हैं।

यह इंसानियत के लिए सबक है: यदि साफ़, पापमुक्त और अहंकार से रहित फ़रिश्ते भी इस तरह समर्पित और नम्र रहते हैं, तो मनुष्य, जो अपूर्ण और निर्भर हैं, उन्हें तो और भी अहंकार या लापरवाही के बिना पूजा करनी चाहिए।
आयत का संदेश है कि अल्लाह के प्रति भक्ति और समर्पण में इस रवैये की नकल करनी चाहिए।

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