कुरान - 7:201 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

201
إِنَّ ٱلَّذِينَ ٱتَّقَوۡاْ إِذَا مَسَّهُمۡ طَـٰٓئِفٞ مِّنَ ٱلشَّيۡطَٰنِ تَذَكَّرُواْ فَإِذَا هُم مُّبۡصِرُونَ

Transliteration: (Innal lazeenat taqaw izaa massahum taaa'ifun minash Shaitaani tazakkaroo fa izaa hum mubsiroon)

निश्चित ही, जो लोग अल्लाह से डरते हैं, जब शैतान की कोई प्रेरणा उन्हें छूती है, वे अल्लाह को याद करते हैं, और फिर वे स्पष्ट दृष्टि पाते हैं [456] (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 201 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-आराफ़ – आयत 201 की तफ़्सीर

 

✅ [456] धर्मपरायण तुरंत पश्चाताप और आत्म-चिंतन करते हैं

यह आयत धर्मपरायण लोगों की विशेषता बताती है। जब शैतानी प्रेरणा उन्हें प्रभावित करती है, वे तुरंत अल्लाह को याद करते हैं, जिससे स्पष्टता और जागरूकता प्राप्त होती है।
उनकी ईश्वर-भक्ति उन्हें त्रुटि या प्रलोभन से जल्दी उबरने में मदद करती है।

इससे यह शिक्षा मिलती है कि सच्चे पश्चाताप के साथ पाप करना, अहंकार से भरी कोई भलाई करने से श्रेष्ठ है। उदाहरण के लिए, हज़रत आदम (अलैहि सलाम) द्वारा अनजाने में वर्जित अनाज खाने की घटना ने नम्र पश्चाताप को जन्म दिया, जो शैतान की अहंकारी पूजा से श्रेष्ठ था।
आयत तुरंत पछताने और पश्चाताप में देरी न करने का महत्व स्पष्ट करती है, क्योंकि शीघ्र आत्म-सुधार सच्ची परहेज़गारी का चिन्ह है।

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