कुरान - 7:199 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

199
خُذِ ٱلۡعَفۡوَ وَأۡمُرۡ بِٱلۡعُرۡفِ وَأَعۡرِضۡ عَنِ ٱلۡجَٰهِلِينَ

Transliteration: (Khuzil 'afwa wa mur bil'urfi wa A'rid 'anil jaahileen)

(ऐ प्यारे नबी ﷺ) आप वह स्वीकार कीजिए जो लोग सहजता से दें, नेकी का हुक्म दीजिए और अज्ञानियों से किनारा कर लीजिए [454]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 199 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-आ़राफ़ – आयत 199 की तफ़्सीर

✅ [454] बर्दाश्त और उत्तम आचरण का हुक्म

इस आयत में नबी ﷺ को हुक्म दिया गया कि वह लोगों से मुआफ़ करने और सहनशीलता का रवैया अपनाएँ, जो लोग खुशी से दें उसे स्वीकार करें, नेकी का आदेश दें और जो अज्ञानी लोग बेअदबी या मूर्खतापूर्ण व्यवहार करें, उनसे किनारा करें। यह हुक्म व्यक्तिगत मामलों में है, ताकि आप छोटे-मोटे अपमान को नज़रअंदाज़ करके उच्च चरित्र का परिचय दें।

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