कुरान - 7:198 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

198
وَإِن تَدۡعُوهُمۡ إِلَى ٱلۡهُدَىٰ لَا يَسۡمَعُواْۖ وَتَرَىٰهُمۡ يَنظُرُونَ إِلَيۡكَ وَهُمۡ لَا يُبۡصِرُونَ

Transliteration: (Wa in tad'oohum ilal hudaa laa yasma'oo wa taraahum yanzuroona ilaika wa hum laa yubsiroon)

और अगर तुम उन्हें हिदायत की तरफ बुलाओ तो वे सुनते नहीं, और तुम उन्हें अपनी ओर देखते हुए समझते हो, जबकि वे असल में देखते नहीं [453]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 198 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-आ़राफ़ – आयत 198 की तफ़्सीर

✅ [453] झूठे माबूद देखने वाले प्रतीत होते हैं लेकिन हक़ीक़त में बेजान हैं

इस आयत में बताया गया है कि उनकी आँखें खुली हुई प्रतीत होती हैं, मानो वे देख रहे हों, लेकिन असल में वे बेजान पत्थर हैं—न सुन सकते हैं, न देख सकते हैं, न समझ सकते हैं। वे हिदायत की पुकार को नहीं सुनते और न ही कोई जवाब दे सकते हैं।

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