Transliteration: (Wa izaa lam ta'tihim bi aayatin qaaloo law lajtabai tahaa; qul innamaaa attabi'u maa yoohaaa ilaiya mir Rabbee; haazaa basaaa'iru mir Rabbikum wa hudanw wa rahmatul liqawminy yu'minoon)
यहाँ "निशानी" से मतलब कुरआनी आयतों से है। जब रहमत या पैग़ाम थोड़ी देर के लिए रुक जाता, तो काफ़िर मज़ाक उड़ाते और पैगंबर ﷺ पर इल्ज़ाम लगाते, जैसे कि यह कोई मज़ाक है। कभी-कभी वे अपनी मर्जी की आयतें मांगते, खास कानून या विषय चुनने के लिए। जब उनकी माँगें पूरी नहीं होतीं, तो वे कुरआन और पैगंबर ﷺ का मज़ाक उड़ाते।
यह आयत उनकी अज्ञानता सुधारती है, बताती है कि पैगंबर ﷺ आयतें खुद नहीं बनाते, बल्कि केवल वही पहुँचाते हैं जो उनके रब की तरफ़ से है।
कुरआन एक स्पष्ट हिदायत है, जिसमें अल्लाह की तरफ़ से ज्ञान और सच्चाई भरी है। यह संपूर्ण इंसानों के लिए आम रहमत है – मार्गदर्शन और चेतावनी देने वाला। लेकिन इसके खास फायदों जैसे ईमान, माफ़ी और हमेशा की बचत केवल ईमानवालों के लिए हैं।
जैसे पैगंबर ﷺ सभी दुनिया के लिए रहमत हैं, वैसे ही यह विशेष आशीष केवल ईमानवालों के लिए है। इसलिए केवल जो लोग ईमान लाते हैं, वे इस दिव्य संदेश का असली फ़ायदा उठाते हैं।
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