कुरान - 7:203 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

203
وَإِذَا لَمۡ تَأۡتِهِم بِـَٔايَةٖ قَالُواْ لَوۡلَا ٱجۡتَبَيۡتَهَاۚ قُلۡ إِنَّمَآ أَتَّبِعُ مَا يُوحَىٰٓ إِلَيَّ مِن رَّبِّيۚ هَٰذَا بَصَآئِرُ مِن رَّبِّكُمۡ وَهُدٗى وَرَحۡمَةٞ لِّقَوۡمٖ يُؤۡمِنُونَ

Transliteration: (Wa izaa lam ta'tihim bi aayatin qaaloo law lajtabai tahaa; qul innamaaa attabi'u maa yoohaaa ilaiya mir Rabbee; haazaa basaaa'iru mir Rabbikum wa hudanw wa rahmatul liqawminy yu'minoon)

और जब आप उन्हें कोई निशानी नहीं लाते, तो वे कहते हैं [457] , "आपने खुद क्यों नहीं चुन लिया?" कह दें: "मैं तो केवल वही अनुसरण करता हूँ जो मेरे रब की तरफ़ से मुझ पर उतारा गया है। यह आपके रब की तरफ़ से एक स्पष्ट हिदायत है, और ईमानवालों के लिए मार्गदर्शन और रहमत है" [458] (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 203 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-आराफ़ – आयत 203 की तफ़्सीर

 

✅ [457] देरी से आए पैग़ाम पर मज़ाक

यहाँ "निशानी" से मतलब कुरआनी आयतों से है। जब रहमत या पैग़ाम थोड़ी देर के लिए रुक जाता, तो काफ़िर मज़ाक उड़ाते और पैगंबर ﷺ पर इल्ज़ाम लगाते, जैसे कि यह कोई मज़ाक है। कभी-कभी वे अपनी मर्जी की आयतें मांगते, खास कानून या विषय चुनने के लिए। जब उनकी माँगें पूरी नहीं होतीं, तो वे कुरआन और पैगंबर ﷺ का मज़ाक उड़ाते।
यह आयत उनकी अज्ञानता सुधारती है, बताती है कि पैगंबर ﷺ आयतें खुद नहीं बनाते, बल्कि केवल वही पहुँचाते हैं जो उनके रब की तरफ़ से है।

✅ [458] कुरआन: ईमानवालों के लिए रहमत

कुरआन एक स्पष्ट हिदायत है, जिसमें अल्लाह की तरफ़ से ज्ञान और सच्चाई भरी है। यह संपूर्ण इंसानों के लिए आम रहमत है – मार्गदर्शन और चेतावनी देने वाला। लेकिन इसके खास फायदों जैसे ईमान, माफ़ी और हमेशा की बचत केवल ईमानवालों के लिए हैं।
जैसे पैगंबर ﷺ सभी दुनिया के लिए रहमत हैं, वैसे ही यह विशेष आशीष केवल ईमानवालों के लिए है। इसलिए केवल जो लोग ईमान लाते हैं, वे इस दिव्य संदेश का असली फ़ायदा उठाते हैं।

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