Transliteration: (Qaala alqoo falam maaa alqaw saharooo a'yunannaasi wastarhaboohum wa jaaa'oo bisihrin 'azeem)
मूसा अलैहिस्सलाम ने जादूगरों को पहले फेंकने की इजाज़त दी, यह जादू की ताईद के लिए नहीं था बल्कि ताकि झूठ को खुलेआम उजागर करके उसे मिटाया जा सके। इससे यह शिक्षा मिलती है कि कभी-कभी किसी गुनाह या कुफ़्र के काम को अस्थायी रूप से होने देना जायज़ है, जब उद्देश्य उसे सार्वजनिक रूप से मात देना हो।
उनका जादू असल में कोई हक़ीक़त नहीं था बल्कि नज़र का धोखा था जिसने लोगों के दिलों में डर बैठा दिया। जादू हक़ीक़त नहीं रखता, वह सिर्फ़ एहसास और तसव्वुर से खेलता है। इसके बरअक्स, अल्लाह के मोजिज़ात और औलिया की करामात हक़ीक़ी होती हैं, उनमें वहम और छलावा नहीं होता।
तफ़्सीर रिवायतों में आता है कि जादूगरों ने इतने रस्से और लाठियाँ लाए थे कि वे तीन सौ ऊँटों पर लादी गईं। जब उन्होंने जादू दिखाया तो पूरी ज़मीन साँपों के समुंदर की तरह हिलती-मचलती दिखाई दी। इस डरावनी नज़ारे ने लोगों को दहला दिया, और मिस्र की सरज़मीन ने इससे पहले इतना बड़ा तमाशा कभी नहीं देखा था।
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