कुरान - 7:79 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

79
فَتَوَلَّىٰ عَنۡهُمۡ وَقَالَ يَٰقَوۡمِ لَقَدۡ أَبۡلَغۡتُكُمۡ رِسَالَةَ رَبِّي وَنَصَحۡتُ لَكُمۡ وَلَٰكِن لَّا تُحِبُّونَ ٱلنَّـٰصِحِينَ

Transliteration: (Fa tawalla 'anhum wa qaala yaa qawmi laqad ablaghtukum Risaalata Rabbee wa nasahtu lakum wa laakil laa tuhibboonan naasiheen)

तो सालेह ने उनसे मुंह फेर लिया और कहा: 'ऐ मेरी क़ौम! बेशक मैंने तुम्हें अपने रब का पैग़ाम पहुंचा दिया था और तुम्हारी ख़ैरख़्वाही की थी, लेकिन तुम ख़ैरख़्वाहों को पसंद नहीं करते।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 79 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-आअराफ़ - आयत 79

✅ नबी का हसरत भरा अलविदाई कलिमा

हज़रत सालेह (अलै.) ने हसरत व अफ़सोस के साथ फ़रमाया कि मैंने तो तुम्हारी भलाई चाही थी मगर तुमने नफ़सी ख़्वाहिशात में डूबकर हक़ का इनकार किया।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now