Transliteration: (Fa in aamanoo bimisli maaa aamantum bihee faqadih tadaw wa in tawallaw fa innamaa hum fee shiqaaq; fasayakfeekahumul laah; wa Huwas Samee'ul Aleem)
📌 सबक़: जो सहाबा के ईमान से हट जाए, उसका रास्ता हिदायत का नहीं, गुमराही (भटकाव) का है।
📖 इतिहासिक वाक़िआ:
जब हज़रत उस्मान बिन अффान (रज़ि.अ.) को मिस्र से आए बाग़ियों ने शहीद किया,
📜 उस खून से दाग़दार मुसहफ़ (क़ुरआन की कॉपी) सालों तक महफ़ूज़ रहा — एक ज़िंदा निशानी इस आयत की सच्चाई की।
📌 यह हिस्से में फतह (जीत) की पेशगोई (Prophecy) भी है —
कि भले मुसलमान कमज़ोर और थोड़े हों, लेकिन सच्चे ईमान के साथ अल्लाह की मदद से बड़ी ताक़तों पर भी ग़ालिब आ सकते हैं।
📖 जैसा कि अल्लाह ने दूसरे मुक़ाम पर फ़रमाया:
"और तुम ही ग़ालिब आओगे — अगर तुम मोमिन हो।" (सूरह 3, आयत 139)
1. असल हिदायत सहाबा की राह पर है:
उनके ईमान जैसा ईमान अपनाना ज़रूरी है।
जो उनसे हटे, वो गुमराही में है।
2. अल्लाह ही सबसे बड़ी ताक़त है:
दुश्मन कितने भी हों, अल्लाह की मदद काफ़ी है।
3. सब कुछ अल्लाह जानता और सुनता है:
वो हमारी भी सुनता है, और दुश्मनों की चालें भी जानता है — इसलिए यक़ीन रखो।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat