Transliteration: (Qoolooo aamannaa billaahi wa maaa unzila ilainaa wa maaa unzila ilaaa Ibraaheema wa Ismaa'eela wa Ishaaqa wa Ya'qooba wal Asbaati wa maaootiya Moosa wa 'Eesaa wa maaa ootiyan Nabiyyoona mir Rabbihim laa nufarriqoo baina ahadim minhum wa nahnu lahoo muslimoon)
📌 नोट:
जो कोई भी एक नबी को भी ना माने — वो काफ़िर कहलाता है। चाहे वो हज़रत ईसा (अ.स.) हों, हज़रत मूसा (अ.स.) हों या किसी और को न माने।
1. तमाम नबियों पर यकसां ईमान:
इस्लाम हमें सिखाता है कि हर नबी पर एक जैसे ईमान लाया जाए — ना किसी को छोटा समझा जाए, ना किसी को छोड़ा जाए।
2. दीन की असलियत व सिलसिला:
इस्लाम कोई नया मज़हब नहीं, बल्कि वही पुराना हक़ का रास्ता है, जो पहले नबियों ने सिखाया।
3. नाम नहीं, काम देखो:
जरूरी नहीं कि हर नबी का नाम हमें मालूम हो — लेकिन ईमान सभी पर ज़रूरी है।
4. फ़र्माबरदारी (Submission):
इस आयत के आख़िर में कहा गया: "और हम उसी के फरमांबरदार हैं" — यानी सिर्फ़ मानना नहीं, अल्लाह की बातों पर अमल करना भी ज़रूरी है।
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