कुरान - 2:286 सूरह अल-बक़रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

286
لَا يُكَلِّفُ ٱللَّهُ نَفۡسًا إِلَّا وُسۡعَهَاۚ لَهَا مَا كَسَبَتۡ وَعَلَيۡهَا مَا ٱكۡتَسَبَتۡۗ رَبَّنَا لَا تُؤَاخِذۡنَآ إِن نَّسِينَآ أَوۡ أَخۡطَأۡنَاۚ رَبَّنَا وَلَا تَحۡمِلۡ عَلَيۡنَآ إِصۡرٗا كَمَا حَمَلۡتَهُۥ عَلَى ٱلَّذِينَ مِن قَبۡلِنَاۚ رَبَّنَا وَلَا تُحَمِّلۡنَا مَا لَا طَاقَةَ لَنَا بِهِۦۖ وَٱعۡفُ عَنَّا وَٱغۡفِرۡ لَنَا وَٱرۡحَمۡنَآۚ أَنتَ مَوۡلَىٰنَا فَٱنصُرۡنَا عَلَى ٱلۡقَوۡمِ ٱلۡكَٰفِرِينَ

Transliteration: (Laa yukalliful-laahu nafsan illaa wus'ahaa; lahaa maa kasabat wa 'alaihaa maktasabat; Rabbanaa laa tu'aakhiznaaa in naseenaaa aw akhtaanaa; Rabbanaa wa laa tahmil-'alainaaa isran kamaa hamaltahoo 'alal-lazeena min qablinaa; Rabbanaa wa laa tuhammilnaa maa laa taaqata lanaa bih; wa'fu 'annaa waghfir lanaa warhamnaa; Anta mawlaanaa fansurnaa 'alal qawmil kaafireen)

286. अल्लाह किसी आत्मा पर उसकी शक्ति से अधिक बोझ नहीं डालता [773]। जो भी भलाई वह कमाता है, वह उसके लिए है और जो भी बुराई वह करता है, वह उसके लिए हानि है [774]। हे हमारे पालनहार! यदि हम भूल जाएं या तुम्हारे निर्धारित नियमों से चूक जाएं, तो हम पर दोष न लगा। हे हमारे पालनहार! हम पर वह भारी बोझ न डाल जो तूने पहले लोगों पर डाला था [776]। हे हमारे पालनहार! हम पर ऐसा बोझ न डाल जो हम सहन करने की ताकत न रखते हों [777]। और हमें माफ़ कर, हमें क्षमा कर और हम पर दया कर [778]। तू ही हमारा रक्षक है, इसलिए हमें काफ़िरों के विरुद्ध मदद दे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-बक़रा आयत 286 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

✅ [773] दिव्य कानून सदैव मानव की क्षमता के भीतर
अल्लाह किसी पर भी ऐसा आदेश नहीं देता जो उसकी क्षमता या ताकत से बाहर हो। उदाहरण:

  • गरीब पर ज़कात की जिम्मेदारी नहीं है
  • हज असमर्थ लोगों पर जरूरी नहीं है
  • बीमारों के लिए क़ियाम (खड़े होकर नमाज़ पढ़ना) जरूरी नहीं है
    इस आयत से अनेक कानूनी सिद्धांत निकलते हैं जो इस्लामी फराइज़ की दया और व्यावहारिकता को दर्शाते हैं।

✅ [774] हर कोई अपने कर्मों का नतीजा भुगतता है
यह भाग सिखाता है कि:

  • जो भलाई कोई करता है, वह उसका लाभ है
  • जो बुराई करता है, वह उसका नुकसान है
    यह भी समझ आता है कि:
    कोई दूसरे की जगह शरीरिक फराइज़ (जैसे रोज़ा, नमाज़) अदा नहीं कर सकता क्योंकि "कमाना" व्यक्तिगत मेहनत को दर्शाता है।
    हालांकि, पुरस्कार दूसरों को भेजना संभव है, जैसा कि यह आयत इनकार नहीं करती।

✅ [775] दुआ में सबसे उपयुक्त शब्दों का चयन
दुआ करते समय, अपने ज़रूरत के अनुसार अल्लाह के विशिष्ट नामों से पुकारना बेहतर होता है। उदाहरण:

  • बीमार के लिए: "सब बीमारियों के ठीक करने वाले"
  • ज़रूरतमंद के लिए: "सभी जरूरतों के पूरा करने वाले"
  • गुनहगार के लिए: "सभी गुनाहों को माफ़ करने वाले"
    फिर भी "हे अल्लाह" और "हे हमारे पालनहार" जैसे शब्द सबसे प्रिय और व्यापक हैं।

✅ [776] पहले की भारी जिम्मेदारियों से राहत माँगना
"भारी बोझ" से मतलब है वो कठिनाइयाँ जो पहले की उम्मतों पर थीं — जैसे यहूदियों पर:

  • आत्महत्या करके माफी की कोशिश
  • गंदे कपड़े जलाना
  • अशुद्ध त्वचा काटना
  • मामूली नफरत पर कड़ी सज़ा
    यह मुसलमानों के लिए अल्लाह की दया को दर्शाता है, जिन्होंने माफी और सफाई के आसान रास्ते खोल दिए।

✅ [777] अत्यधिक कठिन परीक्षाओं से बचाव
यह प्रार्थना कठिन जिम्मेदारियों या परीक्षाओं से बचाने के लिए है जो सहन करना मुश्किल हो। इसका आशय असंभव काम से नहीं है, क्योंकि अल्लाह पहले ही कह चुका है कि वह क्षमता से ऊपर बोझ नहीं डालता। बल्कि यह है:

  • अत्यंत कठिन फराइज़,
  • या जीवन की कठिनाइयाँ, बीमारियाँ और परीक्षाएँ जिन्हें धैर्य से सहना मुश्किल हो।
    यह आयत दुनियावी परीक्षाओं में आसानी और दया की भी गुहार है।

✅ [778] दयालुता और माफी के लिए व्यापक दुआ
यह भाग गहरी संरचित दुआ है, जो शामिल है:

  • "हमें माफ़ कर" — जो पहले किए गए बड़े गुनाहों की माफी के लिए
  • "हमें क्षमा कर" — आने वाले गुनाहों से बचाव और मार्गदर्शन के लिए
  • "हम पर दया कर" — माफी से भी ऊपर की कृपा, जिसमें मार्गदर्शन, रक्षा और स्वीकार्यता शामिल है
    इस प्रकार, कोई दोहराव नहीं है; हर हिस्सा अल्लाह की दया के अलग पहलू को दर्शाता है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now