कुरान - 2:283 सूरह अल-बक़रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

283
۞وَإِن كُنتُمۡ عَلَىٰ سَفَرٖ وَلَمۡ تَجِدُواْ كَاتِبٗا فَرِهَٰنٞ مَّقۡبُوضَةٞۖ فَإِنۡ أَمِنَ بَعۡضُكُم بَعۡضٗا فَلۡيُؤَدِّ ٱلَّذِي ٱؤۡتُمِنَ أَمَٰنَتَهُۥ وَلۡيَتَّقِ ٱللَّهَ رَبَّهُۥۗ وَلَا تَكۡتُمُواْ ٱلشَّهَٰدَةَۚ وَمَن يَكۡتُمۡهَا فَإِنَّهُۥٓ ءَاثِمٞ قَلۡبُهُۥۗ وَٱللَّهُ بِمَا تَعۡمَلُونَ عَلِيمٞ

Transliteration: (Wa in kuntum 'alaa safarinw wa lam tajidoo kaatiban farihaanum maqboodatun fa in amina ba'dukum ba'dan falyu'addil lazi tumina amaa natahoo walyattaqil laaha Rabbah; wa laa taktumush shahaadah; wa mai yaktumhaa fa innahooo aasimun qalbuh; wallaahu bimaa ta'maloona 'Aleem)

और अगर तुम सफ़र में हो और कोई लिखने वाला न पाओ, तो रहन (गिरवी चीज़) क़ब्ज़े में रख ली जाए; फिर अगर तुम में से कोई दूसरे पर भरोसा करे, तो जिस पर भरोसा किया गया है उसे चाहिए कि अपनी अमानत अदा कर दे और अपने रब अल्लाह से डरे; और गवाही को न छुपाओ; और जो कोई उसे छुपाएगा तो बेशक उसका दिल गुनाहगार है; और जो कुछ तुम करते हो अल्लाह उसे ख़ूब जानने वाला है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-बक़रा आयत 283 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-बक़रह - आयत 283

✅ रहन (गिरवी) और गवाही न छुपाने का हुक्म

सफ़र या दस्तावेज़ न मिलने की सूरत में क़र्ज़ के एवज़ चीज़ गिरवी रखने का जाइज़ तरीक़ा और अमानत को दयानतदारी से वापस करने और सच्ची गवाही अदा करने की ताकीद फ़रमाई गई।

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