157
أُوْلَـٰٓئِكَ عَلَيۡهِمۡ صَلَوَٰتٞ مِّن رَّبِّهِمۡ وَرَحۡمَةٞۖ وَأُوْلَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلۡمُهۡتَدُونَ
Transliteration: (Ulaaa'ika 'alaihim salawaatun mir Rabbihim wa rahma; wa ulaaa'ika humul muhtadoon)
157.वे वही लोग हैं जिन पर उनके रब की तरफ़ से बरकतें और रहमतें [330] हैं, और वही सही रास्ते पर चलने वाले हैं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)
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