कुरान - 2:159 सूरह अल-बक़रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

159
إِنَّ ٱلَّذِينَ يَكۡتُمُونَ مَآ أَنزَلۡنَا مِنَ ٱلۡبَيِّنَٰتِ وَٱلۡهُدَىٰ مِنۢ بَعۡدِ مَا بَيَّنَّـٰهُ لِلنَّاسِ فِي ٱلۡكِتَٰبِ أُوْلَـٰٓئِكَ يَلۡعَنُهُمُ ٱللَّهُ وَيَلۡعَنُهُمُ ٱللَّـٰعِنُونَ

Transliteration: (Innal lazeena yaktumoona maaa anzalnaa minal baiyinaati walhudaa mim ba'di maa baiyannaahu linnaasi fil kitaabi ulaaa'ika yal'anuhumul laahu wa yal'anuhumul laa 'inoon)

159. "बेशक जो लोग [335] हमारे नाज़िल किए हुए रौशन सबूतों और हिदायत को छुपाते हैं [336], उस के बाद कि हम उसे किताब में लोगों के लिए वाज़ेह कर चुके होते हैं [337], उन पर अल्लाह की लानत है और तमाम लानत करने वालों की भी लानत है।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-बक़रा आयत 159 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

[335] "जो लोग..."

  • इस आयत का इशारा खास तौर पर यहूदी उलमा (विद्वानों) की तरफ़ है।
  • वो लोग जिन्हें तौरात (Mosaic Law) का इल्म दिया गया था लेकिन उन्होंने इसे जानबूझकर छुपाया।
  • ख़ास कर वो आयात जिनमें हुज़ूर ﷺ की नबूवत, सिफ़ात (गुण) और अंतिम रसूल होने की खबरें थीं।

👉 सबक़: जो लोग हक़ बात जानते हुए भी छुपाते हैं, वो सख़्त गुनाह के मुर्तकिब होते हैं।

[336] "...जो छुपाते हैं उस हिदायत को..."

  • "छुपाना" (कتمان) यानी —
    1. दीन की बातों को ना बताना, जब ज़रूरत हो।
    2. हुक्मों को तोड़-मरोड़ कर पेश करना।
  • यहूदी आलिमों ने:
    • रसूल ﷺ की पहचान वाली आयतों को छुपाया।
    • ज़िना (व्यभिचार) की सज़ा को बदल डाला — शरई हुक्म पत्थर मारना (रज्म) था, मगर उन्होंने सिर्फ़ चेहरा काला करने का नया तरीक़ा बना लिया।

👉 सबक़: दीन की असली बातों को छुपाना या बदलना, बहुत बड़ा गुनाह है, चाहे जानबूझकर हो या किसी लालच या डर से।

[337] "...जबकि हम ने उसे किताब में साफ़ बयान कर दिया था..."

  • अल्लाह तआला ने तौरात वग़ैरह में पहले से ही साफ़ बता दिया था कि:
    • हक़ क्या है
    • रसूल आख़िरी कौन होगा
    • हुक्म क्या हैं
  • इसके बावजूद जिन्होंने उस हक़ को छुपाया, उन पर अल्लाह की लानत (फटकार, नाराज़गी) है।

👉 इसका मतलब ये है कि इल्म और हक़ छुपाना तब और बड़ा गुनाह बन जाता है जब उसे खुलकर लोगों तक पहुँचाना अल्लाह की तरफ़ से ज़िम्मेदारी हो।

"...उन पर अल्लाह की लानत है और सब लानत करने वालों की भी लानत है।"

  • लानत का मतलब है — अल्लाह की रहमत से दूर कर देना।
  • सिर्फ़ अल्लाह नहीं, बल्कि फरिश्ते, नेक लोग, और तमाम सच्चे इंसान भी ऐसे लोगों से नफ़रत करते हैं और उन्हें लानत भेजते हैं।

👉 यह बताने के लिए है कि इल्म छुपाने का गुनाह सिर्फ़ दुनियावी नहीं, बल्कि आख़िरत में भी भारी सज़ा वाला है।

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