कुरान - 2:167 सूरह अल-बक़रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

167
وَقَالَ ٱلَّذِينَ ٱتَّبَعُواْ لَوۡ أَنَّ لَنَا كَرَّةٗ فَنَتَبَرَّأَ مِنۡهُمۡ كَمَا تَبَرَّءُواْ مِنَّاۗ كَذَٰلِكَ يُرِيهِمُ ٱللَّهُ أَعۡمَٰلَهُمۡ حَسَرَٰتٍ عَلَيۡهِمۡۖ وَمَا هُم بِخَٰرِجِينَ مِنَ ٱلنَّارِ

Transliteration: (Wa qaalal lazeenat taba'oo law anna lanaa karratan fanatabarra a minhum kamaa tabarra'oo minnaa; kazaalika yureehimullaahu a'maalahum hasaraatin 'alaihim wa maa hum bikhaarijeena minan Naar)

"167. और उनके अनुयायी कहेंगे: ऐ अफ़सोस! काश हमें फिर से (दुनिया की) ज़िन्दगी मिलती [354], तो हम उनसे अलग हो जाते जैसे वे हमसे अलग हो गए थे। तो अल्लाह उन्हें उनके (बुरे) कर्मों को उनकी आँखों के सामने ऐसी गहरी तकलीफ़ के रूप में दिखाएगा [355], जो उनके लिए बहुत दुःखद होगी। और वे कभी (तेज जलती हुई) आग से बाहर नहीं निकलेंगे।" [356] (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-बक़रा आयत 167 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

[354]

अनुयायियों का पछतावा

  • काफ़िरों के अनुयायी क़यामत के दिन पछताएंगे, वे चाहेंगे कि काश उन्हें फिर से ज़िन्दगी मिलती।
  • वे चाहेंगे कि वे अपने उन नेताओं से अलग हो जाएं जैसे वे नेताओं ने उनसे अलगाव किया था जब वे तकलीफ़ में थे।
  • मुमिनों के लिए मौत दुनिया की तकलीफ़ों से छुटकारा है, इसलिए वे कभी दुनिया में लौटना नहीं चाहेंगे।

[355]

काफ़िरों के गहरे दुख का कारण

  • काफ़िरों के अनुयायी अपनी ग़लतियों और बुरे कर्मों को देखकर गहरा दुख और तकलीफ़ महसूस करेंगे।
  • यह तकलीफ़ उनके लिए बहुत ही कष्टदायक होगी।

[356]

नर्क की सज़ा और उसका अंत

  • ये लोग नर्क की तेज़ जलती हुई आग से कभी बाहर नहीं निकल पाएंगे।
  • उनकी सज़ा हमेशा के लिए रहेगी।
  • मुमिनों की सज़ा सीमित होती है और उनके अच्छे अमल स्वीकार किए जाते हैं, जबकि काफ़िरों का दुख कभी खत्म नहीं होगा।

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