कुरान - 2:211 सूरह अल-बक़रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

211
سَلۡ بَنِيٓ إِسۡرَـٰٓءِيلَ كَمۡ ءَاتَيۡنَٰهُم مِّنۡ ءَايَةِۭ بَيِّنَةٖۗ وَمَن يُبَدِّلۡ نِعۡمَةَ ٱللَّهِ مِنۢ بَعۡدِ مَا جَآءَتۡهُ فَإِنَّ ٱللَّهَ شَدِيدُ ٱلۡعِقَابِ

Transliteration: (Sal Banee Israaa'eela kam aatainaahum min aayatim baiyinah; wa mai yubaddil ni'matal laahi mim ba'di maa jaaa'athu fa innallaaha shadeedul'iqaab)

211. कहो [487] बच्चों इस्राएल से कि हमने उन्हें कितने स्पष्ट संकेत भेजे हैं। और जो कोई भी अल्लाह के इनाम को प्राप्त करने के बाद उसे बदल दे, तो निश्‍चित ही अल्लाह सख्त सजा देने वाला है [488]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-बक़रा आयत 211 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

✅ [487] यहूदियों की नापरवाही उजागर करने के लिए एक सवाल
"पूछो" का यह आदेश बच्चों इस्राएल को उनकी नासमझी पर सवाल उठाने और उन्हें शर्मिंदा करने के लिए है, ताकि वे याद करें कि उन्हें कितने स्पष्ट संकेत दिये गए थे।
🔹 यह उनसे उनके इनामों को नकारने और लगातार नाफरमानी करने को स्वीकार करने के लिए प्रेरित करता है, जबकि उन्हें अल्लाह की हिदायत मिल चुकी थी।

✅ [488] वचन-विपरीत करने से आता है ईश्वरीय क्रोध
यहूदियों ने जान-बूझकर तोराह की आयतों को बदल दिया था जिनमें पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ और उनकी विशेषताओं का वर्णन था।
🔹 यह आयत इस प्रकार की बदलाव और विकृति की ओर इशारा करती है।
🔹 इससे हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह की रहमतें सबसे बड़ी नेमतें हैं, और उन्हें शब्दों या अर्थ में बदलना या गलत समझाना एक बड़ा पाप है।
🔹 यह उन अनपढ़ या भ्रमित करने वाले क़ुरआन व्याख्याकारों के लिए चेतावनी है कि वे ऐसी गलतियां दोहराएं नहीं।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now