Transliteration: (Feeha kutubun qaiyimah )
क़ुरआन अल्लाह की तरफ़ से आख़िरी, बदलाव से महफ़ूज़, और हर दौर के लिए मार्गदर्शन है। ये सिर्फ़ एक किताब नहीं, बल्कि ज़िंदा मोजिज़ा है जिसमें गुज़िश्ता, हाल और मुस्तक़बिल के सारे सच छिपे हैं। चलिए, इसकी ख़ास बातें समझें:
1. ग़ैब का इल्म (अदृश्य का ज्ञान)
क़ुरआन में मौजूद है:
तारीख़ी किस्से: फ़िरऔन, आद, समूद जैसी क़ौमों के हालात, जो उस ज़माने के लोग नहीं जानते थे।
मुस्तक़बिल की भविष्यवाणियाँ: रूम की जीत (सूरह अर-रूम 30:2-4) और इस्लाम के दुनिया में फैलने का वादा।
कायनात के राज़: ब्रह्मांड का फैलाव, भ्रूण की तशकील, रूह और आख़िरत का बयान—जो आज की साइंस से मेल खाते हैं।
अल्लाह का फरमान:
وَمَا كَانَ هَـٰذَا الْقُرْآنُ أَن يُفْتَرَىٰ مِن دُونِ اللَّـهِ...
"ये क़ुरआन किसी इंसान की बनाई हुई चीज़ नहीं, बल्कि अल्लाह की तरफ़ से है जो पिछली किताबों को सच्चा बताता है।"
(सूरह यूनुस 10:37)
2. हमेशा के लिए हुक्म (अहकाम)
क़ुरआन देता है:
आलमगी क़ानून: इंसाफ़, ज़कात, सूद की मनाही—हर दौर और समाज के लिए।
लचीले उसूल (मक़ासिद-ए-शरीयत): वक़्त के साथ बदलती ज़रूरतों के हिसाब से हल।
आख़िरी किताब: पुरानी शरीयतें (तौरात, इंजील) मंसूख़ हो चुकी हैं, सिर्फ़ क़ुरआन मानने का हुक्म है।
3. अल्लाह की हिफ़ाज़त
अल्लाह का वादा:
إِنَّا نَحْنُ نَزَّلْنَا الذِّكْرَ وَإِنَّا لَهُ لَحَافِظُونَ
"हमने ही इस क़ुरआन को उतारा है, और हम ही इसकी हिफ़ाज़त करेंगे।"
(सूरह अल-हिज्र 15:9)
बिना बदलाव: आज भी क़ुरआन वैसा ही है जैसा 1400 साल पहले था। लाखों हुफ़्फ़ाज़ इसे याद करते हैं, और इस्नाद (सिलसिला-ए-रिवायत) से यह पहुँचा है।
इ'जाज़-ए-बयानी: इसकी अरबी ज़बान और अंदाज़-ए-बयान इंसानी नक़ल से परे है।
4. हर पहलू का रहनुमा
क़ुरआन सिखाता है:
फ़र्दी ज़िंदगी: रूह की पाकीज़गी (तज़किया), नमाज़, और अल्लाह से राब्ता।
इज्तिमाई मुआशरा: हुकूमत, ख़ानदानी क़ानून, और इंसाफ़।
ग़ैबी हक़ाएक़: जन्नत, दोज़ख़, क़यामत, और मलाइका की दुनिया।
क़ुरआन अल्लाह की कुदरत और पैग़म्बर (सल्ल.) की सच्चाई का सबूत है। ये वह फ़ुरक़ान है जो हमेशा सच और बातिल में फ़र्क करेगा:
قُلْ إِنَّ هُدَى اللَّـهِ هُوَ الْهُدَىٰ
"कह दो: अल्लाह की हिदायत ही असली हिदायत है।"
(सूरह अल-बक़रह 2:120)
ये क़ुरआन का वादा है—जो इसे मानेगा, दुनिया और आख़िरत में कामयाब होगा। और जो इन्कार करेगा, वही नुक़सान में रहेगा।
इस तरह, क़ुरआन सिर्फ़ एक किताब नहीं, बल्कि ज़िंदा मोजिज़ा और इंसानियत की रहनुमाई का सबसे बड़ा स्रोत है।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat