कुरान - 105:1 सूरह अल-फील अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

1
أَلَمۡ تَرَ كَيۡفَ فَعَلَ رَبُّكَ بِأَصۡحَٰبِ ٱلۡفِيلِ

Transliteration: (Alam tara kaifa fa'ala rabbuka bi ashaabil feel)

1.क्या आपने नहीं देखा कि आपके रब ने हाथी के साथियों के साथ कैसे व्यवहार किया [1]? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-फील आयत 1 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

काबा के दुश्मनों का दंड (The Punishment of the Enemies of the Holy Ka'bah)

पिछली सूरह में अल्लाह ने पैग़ंबर ﷺ के दुश्मनों के लिए आख़िरत में दंड का जिक्र किया था, लेकिन इस सूरह में काबा के दुश्मनों के लिए सांसारिक दंड पर ध्यान दिया गया है। यह ध्यान रखना जरूरी है कि पैग़ंबर ﷺ का दर्जा काबा से अधिक है, इसलिए काबा के दुश्मनों की तुलना में पैग़ंबर ﷺ के दुश्मन अधिक दंड के हकदार हैं। यही कारण है कि पहले पैग़ंबर ﷺ के दुश्मनों का दंड बताया गया और अब काबा के दुश्मनों के दंड की चर्चा की जा रही है।

अबरहा द्वारा काबा को नष्ट करने का प्रयास (The Incident of Abraha’s Attempt to Destroy the Ka'bah)
अबरहा की सेना और हाथी (Abraha’s Army with Elephants):
अबरहा, जो यमन का गवर्नर था, एबिसिनिया के सम्राट द्वारा नियुक्त था और उसने अपनी सेना के साथ सना से यात्रा की। वह काबा को नष्ट करने के लिए मक्का आया और अपनी सेना में बारह हाथी ले आया। उनकी सेना मक्का से लगभग तीन मील दूर मुथसर घाटी में खड़ी हो गई। वहीं अल्लाह ने अबाबील नामक छोटे पक्षियों को पत्थर लेकर भेजा और इन पक्षियों ने पूरी सेना को नष्ट कर दिया।

संबंधित संदर्भ (Related Reference):
सूरह अत-तौबा (9:51)
"कहो, 'हम कभी भी वही प्राप्त करेंगे जो अल्लाह ने हमारे लिए तय किया है; वही हमारा रक्षक है।' और अल्लाह पर विश्वास करने वाले को चाहिए कि वही भरोसा करें।"

यह आयत ईमानवालों की सुरक्षा और काबा जैसे पवित्र स्थलों की पवित्रता को दिखाती है, जिसे अल्लाह ने अपनी रक्षा का वादा किया है।

अबरहा की काबा के प्रति दुश्मनी का कारण (Background of Abraha’s Malice):
अबरहा काबा से जलन (jealousy) करता था। यमन के लोग अपनी पेशकशें काबा को भेजते थे, इस पर उसने सना में एक बड़ा मंदिर बनाने का सोचा, जिसे क़लीस कहा जाता था। यह मंदिर संगमरमर और रत्नों से सजाया गया था, लेकिन यह काबा जितनी प्रसिद्धि नहीं पा सका।

मक्का के जुबैर बिन अम्र ने क़लीस को अपवित्र (defile) किया और फिर एक आग ने उसे पूरी तरह से जला दिया। इससे अबरहा बहुत नाराज हुआ और काबा को नष्ट करने के लिए हाथियों के साथ अपनी सेना लेकर मक्का आ गया।

संबंधित संदर्भ (Related Reference):
सूरह अल-बुरुज (85:1-3)
"आसमान की क़ुर्बानियों (constellations) की क़समें, और वादा किए गए दिन की, और गवाह और जो गवाही दी जा रही है।"

यह आयत बताती है कि अल्लाह अपनी शक्ति से पवित्र स्थलों की रक्षा करता है और उन पर आक्रमण करने वालों को दंड देता है।

अबरहा और हज़रत अब्दुल मुत्तलिब की मुलाकात (The Encounter with Hazrat Abdul Muttalib):
जब अबरहा की सेना मुथसर घाटी में पहुंची, तो उन्होंने देखा कि सबसे बड़ा हाथी महमूद आगे बढ़ने से इंकार कर रहा था। इसी बीच, अबरहा के सैनिकों ने हज़रत अब्दुल मुत्तलिब के ऊंटों को लूट लिया। हज़रत अब्दुल मुत्तलिब ने अबरहा से अपने ऊंट वापस मांगे और जब अबरहा ने सोचा कि वह काबा की सुरक्षा की बात करने आए हैं, तो हज़रत अब्दुल मुत्तलिब ने कहा, "ऊंट मेरे हैं, मैं सिर्फ़ उन्हें वापस चाहता हूं। काबा अल्लाह का है, और वह उसकी रक्षा करेगा।"

संबंधित संदर्भ (Related Reference):
सूरह अल-हज्ज (22:40)
"जो लोग बिना किसी अधिकार के अपने घरों से निकाले गए—सिर्फ़ इसलिए कि वे कहते हैं, 'हमारा रब अल्लाह है।' और अगर अल्लाह ने एक समूह को दूसरे से न रोक लिया होता, तो मठ, चर्च, सिनागोग और मस्जिदें—जहां अल्लाह का नाम लिया जाता है—नष्ट हो जातीं।"

यह आयत काबा जैसी अल्लाह की पवित्र जगहों की सुरक्षा को दिखाती है, जिसे अल्लाह हमेशा सुरक्षित रखता है।

ईश्वर की दैवीय हस्तक्षेप (The Divine Intervention):
जब अबरहा हमला करने के लिए तैयार हो रहा था, तो जेद्दा से छोटे हरे पक्षी आए, जिनके पास छोटे पत्थर थे। इन पत्थरों से अबरहा की पूरी सेना नष्ट हो गई, जिसमें हाथी भी शामिल थे। अबरहा और उसकी सेना का पूरा नाश हो गया।

यह चमत्कारी घटना मुहर्रम की 17वीं तारीख़ को हुई थी, और यह काबा की सुरक्षा के लिए अल्लाह का स्पष्ट संकेत था।

संबंधित संदर्भ (Related Reference):
सूरह अन-नहल (16:17)
"क्या वह जिसने बनाया है, उसके समान है जिसने नहीं बनाया? क्या तुम तब भी ध्यान नहीं दोगे?"

यह आयत यह दिखाती है कि अल्लाह की शक्ति ऐसी है कि छोटे पक्षी भी बड़ी सेना को नष्ट कर सकते हैं।

निष्कर्ष (Conclusion):
यह घटना अल्लाह की शक्ति को दर्शाती है और काबा की रक्षा करती है, जो अल्लाह के पवित्र स्थान हैं। काबा के दुश्मनों के दंड का यह उदाहरण हमें यह सिखाता है कि जो अल्लाह की इच्छा के खिलाफ काम करते हैं, उनका अंत बुरा होता है।

संबंधित संदर्भ (Related Reference):
सूरह आल-इम्रान (3:96)
"वास्तव में, मनुष्यों के लिए पहला घर मक्का में था, जो आशीर्वाद और दुनिया के लिए मार्गदर्शन था।"

यह आयत काबा की अहमियत और उसकी सुरक्षा को दिखाती है।

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