कुरान - 105:4 सूरह अल-फील अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

4
تَرۡمِيهِم بِحِجَارَةٖ مِّن سِجِّيلٖ

Transliteration: (Tarmeehim bihijaaratim min sijjeel )

4.जो उन्हें पकाई हुई मिट्टी के पत्थरों से मार रहे थे [4]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-फील आयत 4 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तुतरी पक्षियों और उनकी बुद्धि (The Swallow Birds and Their Wisdom)

अल्लाह तआला द्वारा भेजे गए तुतरी प्रकार के पक्षियों की घटना, जो अब्राहा की सेना को हराने के लिए भेजे गए थे, ईश्वरीय बुद्धि और पहचान का एक शक्तिशाली पाठ है जो अल्लाह अपनी सृष्टि को प्रदान करते हैं। ये पक्षी, जो छोटे होने के बावजूद असाधारण बुद्धिमत्ता और सटीकता रखते थे, प्रत्येक पत्थर को सही निशाने पर फेंकते थे, जैसे कि उन्हें दुश्मनों के नामों का पता हो। इन पत्थरों में न केवल शारीरिक हानि थी, बल्कि अल्लाह की ईश्वरीय न्याय की सजा भी थी, जो प्रत्येक सैनिक को, उनके हाथी सहित, भयंकर विनाश की ओर ले गई। पत्थर इतने सटीक थे कि वे सैनिकों के सिर को कुचल देते थे, उनके शरीर को फाड़ देते थे और यहां तक कि हाथियों को भी छेद देते थे, जिससे जमीन में गहरे गड्ढे हो जाते थे।

संबंधित संदर्भ (Related Reference):
सूरह अल-फिल (105:3-5)
"उन्होंने [पक्षियों ने] उन पर सिज्जील के पत्थर फेंके, और उन्हें खाए हुए घास की तरह बना दिया।"
यह आयत इन पक्षियों द्वारा दुश्मन की सेना के विरुद्ध लाई गई सटीक और लक्षित विनाश की बात करती है, जिन्होंने पत्थरों से दुश्मन की पूरी सेना को नष्ट कर दिया।

जानवरों में पहचान और बुद्धि का पाठ (Lesson of Recognition and Wisdom in Animals)
इस अद्वितीय घटना से हम यह सीखते हैं कि अल्लाह ने केवल इंसानों को ही नहीं, बल्कि जानवरों को भी बुद्धिमत्ता और जागरूकता दी है। तुतरी पक्षियों ने विशिष्ट काफिरों को पहचाना और उन्हें सटीकता के साथ निशाना बनाया, ठीक वैसे ही जैसे एक डाकिया अपने पत्रों को सही पते पर पहुँचाता है। यह हमें सिखाता है कि जानवरों में भी एक प्रकार की बुद्धिमत्ता और अच्छे और बुरे के बीच फर्क करने की क्षमता होती है।

यह पहली बार नहीं है जब क़ुरआन में जानवरों से प्राप्त बुद्धि का उल्लेख किया गया है। हज़रत सुलैमान (अलैहि सलाम) के पास जानवरों पर नियंत्रण था, और वह उनसे बातचीत करते थे, जैसे कि वह चींटी जो अन्य चींटियों को एक आने वाली सेना के बारे में चेतावनी देती थी, और हुड-हुड (हूप-ओ) पक्षी, जो महत्वपूर्ण जानकारी उन्हें लाकर देता था।

संबंधित संदर्भ (Related Reference):
सूरह अन-नमल (27:38-40)
"उन्होंने [सुलैमान ने] कहा, 'हे जिनों की सभा, तुममें से कौन मुझे उसका सिंहासन लाकर देगा, इससे पहले कि वे मुझे समर्पण में आकर मिले?' जिनों में से एक मजबूत शैतान ने कहा, 'मैं इसे तुम्हारे पास लाऊँगा, इससे पहले कि तुम अपने स्थान से उठो, और निश्चय ही मैं मजबूत हूँ, और इस काम के लिए विश्वास योग्य हूँ।' एक ऐसा व्यक्ति, जिसके पास क़िताब का ज्ञान था, ने कहा, 'मैं इसे तुम्हारे पास एक पलक झपकते ही लाकर दूँगा!'"
यह आयत हज़रत सुलैमान (अलैहि सलाम) के अधीन जानवरों और प्राणियों की असाधारण क्षमताओं को दर्शाती है, जो उनके साथ दी गई ईश्वरीय बुद्धि को रेखांकित करती है।

सिंह से हज़रत सफ़ीना की सुरक्षा (Wisdom from the Lion Protecting Hazrat Safeena)
इसी तरह, एक और उदाहरण में कहा जाता है कि एक सिंह ने हज़रत सफ़ीना की रक्षा की, जो नबी ﷺ के एक भक्त थे। यह दिखाता है कि ईश्वरीय सृष्टि में बुद्धि और उद्देश्य है जो अल्लाह के नेक सेवकों की सेवा करती है। जानवरों की सुरक्षा और सेवा की क्षमता यह दर्शाती है कि वे ईमानदारों की अहमियत और पवित्रता को पहचान सकते हैं और उसके अनुसार कार्य कर सकते हैं।

नबी ﷺ की शफाअत (Lesson on the Intercession of the Prophet ﷺ)
इस कहानी से हम एक महत्वपूर्ण पाठ प्राप्त करते हैं, वह है नबी ﷺ की शफाअत (intercession)। ठीक वैसे ही जैसे पक्षी प्रत्येक सैनिक को पहचानकर पत्थरों को सटीकता से फेंकते थे, कुछ लोग यह सवाल कर सकते हैं कि नबी ﷺ किस तरह अपने अनुयायियों को क़ियामत (Day of Judgment) के दिन पहचानेंगे। यह घटना एक अनुस्मारक है कि जैसे अल्लाह तआला ने पक्षियों को दुश्मनों को पहचानने और उन्हें निशाना बनाने की क्षमता दी, वैसे ही नबी ﷺ को अपने अनुयायियों को पहचानने की शक्ति दी है, और शफाअत उन लोगों को दी जाएगी जिन्हें नबी ﷺ पहचानेंगे, जैसे पक्षियों ने अपने लक्ष्यों को पहचाना।

संबंधित संदर्भ (Related Reference):
सूरह अल-बकरा (2:254)
"हे तुम जो ईमान लाए हो, उस चीज़ में से खर्च करो जो हमने तुम्हें दी है, इससे पहले कि ऐसा दिन आए जब न कोई बदला लिया जा सके, न कोई दोस्ती हो, न शफाअत हो।"
यह आयत क़ियामत के दिन की बात करती है, जब शफाअत दी जाएगी, और यह रेखांकित करती है कि जो लोग इसके हकदार होंगे, उन्हें नबी ﷺ द्वारा पहचाना जाएगा, जैसे पक्षियों ने अपने दुश्मनों को पहचाना।

निष्कर्ष (Conclusion)
यह पाठ हमें यह सिखाता है कि ईश्वरीय बुद्धि मानव की सीमाओं से परे है, और यहां तक कि सबसे साधारण जीव भी अल्लाह की इच्छा को पूरा करने के लिए सक्षम हैं। इस घटना में पक्षियों की बुद्धिमत्ता इस व्यापक सिद्धांत को दर्शाती है कि अल्लाह ने अपनी सृष्टि को विभिन्न प्रकार की बुद्धि से नवाजा है, और कोई भी उसकी पहचान से बाहर नहीं है। इसके अलावा, क़ियामत के दिन नबी ﷺ की शफाअत एक वास्तविकता होगी, और जैसे पक्षियों ने अपने संदेश को सटीकता से पहुंचाया, नबी ﷺ अपने अनुयायियों को पहचानेंगे और उनके लिए शफाअत करेंगे।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now