कुरान - 105:2 सूरह अल-फील अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

2
أَلَمۡ يَجۡعَلۡ كَيۡدَهُمۡ فِي تَضۡلِيلٖ

Transliteration: (Alam yaj'al kaidahum fee tadleel)

2.क्या उसने उनका षड्यंत्र नष्ट नहीं किया [2]? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-फील आयत 2 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

काबा की सुरक्षा और पैगंबर ﷺ (The Protection of the Ka'bah and the Prophet ﷺ)

अब्राहा के पास विशाल सेना और संसाधनों (resources) का विशाल भंडार था, लेकिन वह अकेला नहीं था काबा को नष्ट करने के प्रयास में। कुछ अरबी, जिनमें ताइफ के लोग भी शामिल थे, ने उसे मक्का जाने का मार्ग दिखाया। मक्का के लोग काबा की रक्षा (protection) छोड़कर गुफाओं में छिप गए थे, जिससे काबा असुरक्षित (unprotected) हो गया। फिर भी, इसके बावजूद, अल्लाह (Allah) ने शहर और काबा दोनों की रक्षा (protection) की, यह दिखाते हुए कि चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी गंभीर (dire) हों, अल्लाह की सुरक्षा (protection) अनमिच है (unmatched)।

संबंधित संदर्भ (Related Reference):

सूरह अल-अन्फाल (8:24)
"हे तुम लोग जो ईमान लाए हो, जब वह तुम्हें उस चीज़ के लिए पुकारे जिससे वह तुम्हारे जीवन (life) का कारण बन जाए तो अल्लाह और उसके रसूल (Messenger) का उत्तर (response) दो।"
यह आयत हमें याद दिलाती है कि सच्ची सुरक्षा (true protection) और मार्गदर्शन (guidance) केवल अल्लाह से आता है। चाहे विरोध (opposition) कितना भी बड़ा हो, अल्लाह की प्रतिक्रिया (response) हमेशा उसके विश्वासियों (believers) के लिए पर्याप्त (sufficient) होगी।
यह दिव्य सुरक्षा (divine protection) केवल काबा तक सीमित (limited) नहीं है, बल्कि अल्लाह ने अपने प्रिय पैगंबर ﷺ को भी, भले ही वह अकेले (alone) हों, पूरी दुनिया के विरोध (opposition) के खिलाफ सुरक्षा (protection) का वादा किया है।

पैगंबर ﷺ और आध्यात्मिक काबा (The Prophet ﷺ as the Spiritual Ka'bah)

जहां काबा एक भौतिक (physical) पवित्र स्थान (sanctuary) है, वहीं पैगंबर ﷺ को आध्यात्मिक (spiritual) काबा माना जाता है। काबा पूजा का घर (house of worship) है, लेकिन पैगंबर ﷺ विश्वास (faith) का केंद्र (center), सभी विश्वासियों (believers) का दिल (heart) हैं। जैसे काबा पूजा के कृत्यों (acts of worship) का भौतिक (physical) केंद्र (focal point) है, वैसे ही पैगंबर ﷺ विश्वासियों के लिए आध्यात्मिक (spiritual) केंद्र और मार्गदर्शक (guiding light) हैं।

संबंधित संदर्भ (Related Reference):

सूरह अल-अहज़ाब (33:6)
"पैगंबर ﷺ ईमान वालों से उनके अपने आप से भी करीब (closer) हैं।"
यह आयत पैगंबर ﷺ के विश्वासियों से आध्यात्मिक (spiritual) नजदीकी (proximity) को रेखांकित (highlight) करती है, और उनके जीवन में उनके केंद्रीय (central) और महत्वपूर्ण (important) स्थान (role) को प्रदर्शित करती है।
जैसे काबा नमाज़ के लिए दिशा (direction) है, वैसे ही पैगंबर ﷺ आध्यात्मिक मार्गदर्शन (spiritual guidance) और इबादत (worship) के लिए दिशा (direction) हैं। काबा एक भौतिक संरचना (physical structure) हो सकता है, लेकिन पैगंबर ﷺ उमmah (समूह) का दिल (heart) हैं, जो विश्वासियों को अल्लाह की इबादत (worship) की ओर मार्गदर्शन (guide) करते हैं।

झूठ का अस्थायी स्वरूप और इस्लाम का शाश्वत सत्य (The Transitory Nature of Falsehood and the Eternal Truth of Islam)

झूठ और सत्य के विरोध (opposition) को मजबूत और जोरदार (loud) दिखाया जा सकता है, जैसे अब्राहा की सेना (Abraha’s army), लेकिन वे अस्थायी (short-lived) होते हैं। जैसे अब्राहा की सेना नष्ट हो गई और उसके प्रयास (efforts) विफल (failed) हो गए, वैसे ही झूठ का जीवनकाल (lifespan) क्षणिक (fleeting) है। झूठ अक्सर शक्तिशाली (powerful) लगता है, लेकिन यह लंबे समय तक नहीं चल सकता। समाचारपत्र का जीवन एक दिन (one day) है, रेलवे का समय सारणी छह महीने (six months) के लिए है, और यहां तक कि विश्वविद्यालय का पाठ्यक्रम (curriculum) भी कुछ वर्षों (years) के बाद बदल जाता है। लेकिन पवित्र क़ुरान (Holy Qur'an) और इस्लाम का सत्य (truth) शाश्वत (eternal) है।

संबंधित संदर्भ (Related Reference):

सूरह अल-इसरा (17:81)
"और कह दो, 'सत्य आ गया और झूठ चला गया। निश्चय ही, झूठ हमेशा चला जाता है।'"
यह आयत यह विचार मजबूत करती है कि सत्य, चाहे वह कितना भी दबा हुआ (overpowered) क्यों न हो, हमेशा विजयी (victorious) होगा, जबकि झूठ (falsehood) अंततः मिट (fade) जाएगा।
इसी तरह, अब्राहा का जीवन (life) संक्षिप्त (brief) था, और काबा को नष्ट करने का उसका प्रयास (attempt) असफल (failed) हो गया। अबू जाहल (Abu Jahl), जिसने पैगंबर ﷺ का विरोध (opposed) किया, ने भी संक्षिप्त (short-lived) जीवन (life) जी, जबकि पैगंबर ﷺ और काबा शाश्वत (eternal) रहेंगे।

संबंधित संदर्भ (Related Reference):

सूरह अल-मुजादिला (58:8)
"क्या तुमने नहीं देखा उन लोगों को जिन्हें गुप्त मंत्रणा (secret counsel) से रोका गया था, फिर वे उसी में लौट आए थे जिसे उन्हें रोकने के लिए मना किया गया था और वे पाप (sin) और आक्रामकता (aggression) में मिलकर साजिश (conspired) करने लगे और रसूल (Messenger) के प्रति नाफरमानी (disobedience) करने लगे।"
इसके बावजूद, सत्य अविचल (unshaken) रहता है, क्योंकि अल्लाह की सुरक्षा और सत्य शाश्वत (eternal) हैं। पैगंबर ﷺ और काबा हमेशा कायम (endure) रहेंगे, चाहे विरोध (opposition) कितना भी हो।

निष्कर्ष (Conclusion)

काबा अल्लाह की सुरक्षा का प्रतीक (symbol) और सभी मुसलमानों के लिए इबादत का केंद्र (center of worship) है। इसे नष्ट करने के लिए किए गए सभी प्रयासों (attempts) के बावजूद, अल्लाह ने इसे सुरक्षित (protected) रखा। इसी तरह, पैगंबर ﷺ, आध्यात्मिक काबा के रूप में, अल्लाह की सुरक्षा में (under Allah's protection) हैं, और चाहे विरोध कितना भी बड़ा हो, अल्लाह की योजना (plan) हमेशा विजय (prevail) करेगी। झूठ चाहे कितना भी जोरदार क्यों न लगे, इस्लाम का शाश्वत (eternal) सत्य, जो पैगंबर ﷺ और काबा द्वारा दर्शाया गया है, कभी नहीं मरेगा (fade)। पैगंबर ﷺ की विरासत (legacy) अमर (immortal) है, जबकि उनके शत्रुओं के झूठ (falsehood) का जीवन संक्षिप्त (short-lived) है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now