कुरान - 15:91 सूरह अल-हिज्र अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

91
ٱلَّذِينَ جَعَلُواْ ٱلۡقُرۡءَانَ عِضِينَ

Transliteration: (Allazeena ja'alul Quraana'ideen)

जिन्होंने क़ुरआन के टुकड़े-टुकड़े कर दिए [103] (कुछ को माना और कुछ का इनकार किया)। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हिज्र आयत 91 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हिज्र – आयत 91 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

जिन्होंने क़ुरआन के टुकड़े-टुकड़े कर दिए [103]।

[103] आसमानी किताबों में मनमानी और क़ुरआन पर तन्ज़

इससे मुराद पहले अहले-किताब (यहूदी व ईसाई) हैं जिन्होंने अपनी किताबों में रद्दोबदल किया — जो हिस्सा उनके मुवाफ़िक़ था उसे माना और बाक़ी को झुठला दिया या छिपा दिया। इसी तरह मक्का के मुशरिक़ीन भी क़ुरआन-ए-पाक के मुख़्तलिफ़ टुकड़े करते थे: कोई इसे जादू कहता, कोई शायरी, और कोई पुरानी कहानियाँ। यह आयत दीन के अहकाम में अपनी पसन्द के मुताबिक़ कुछ को मानने और कुछ को ठुकराने की सख़्त मज़म्मत करती है।

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